दिल्ली के एक कॉल से कतरे मंत्री लखन पटेल के पर! पशुपालन विभाग छिना, अब मिला आनंद विभाग का जिम्मा
मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन मंत्री लखन पटेल के पर कतर दिए हैं। दिल्ली से आए एक कॉल के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाराज होने की चर्चा है। इसके बाद रातों-रात पटेल से पशुपालन विभाग ले लिया गया।
मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस ले लिया है। देर रात (14-15 जुलाई) इसका गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। अब उन्हें आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने अभी तक इस बदलाव की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
रातों-रात मंत्री का विभाग बदला
बताया जा रहा है कि फोन आने के बाद सीएम मोहन यादव नाराज थे। इसके बाद रातों-रात सरकारी प्रेस खोली गई, नोटिफिकेशन छापा और उसे दिल्ली भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक बात यहां तक पहुंच गई थी कि पटेल से मंत्री पद छीना जा सकता है। लेकिन अगर ऐसा होता तो सरकार को मंत्रिमंडल में बदलाव करना पड़ता। इसी स्थिति से बचने के लिए फिलहाल सिर्फ राज्यमंत्री लखन पटेल का विभाग बदल दिया गया है। मामला संगीन है और चर्चा है कि सामने आने पर सरकार की छवि को नुकसान पहुंच सकता था। फिलहाल पशुपालन विभाग मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पास रख लिया है। बताया जा रहा है कि प्रदेश की गौशालाओं से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर भी मुख्यमंत्री नाराज थे। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कौन हैं लखन पटेल ?
लखन पटेल ने अपना पहला विधानसभा चुनाव साल 2013 में भाजपा के टिकट पर दमोह जिले की पथरिया सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने। हालांकि, 2018 के चुनाव में उन्हें बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार रामबाई के सामने हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में लखन पटेल ने शानदार वापसी की और एक बार फिर पथरिया सीट से जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट में उन्हें स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री के तौर पर जगह दी गई। लखन पटेल की गिनती मध्य प्रदेश बीजेपी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं में होती है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पथरिया सीट से मैदान में उतारा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के कुंवर पुष्पेंद्र सिंह हजारी से हुआ। पटेल ने 7,315 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 60 हजार 083 वोट मिले थे, जबकि हजारी को 52 हजार 768 वोट मिले थे।
2018 के विधानसभा चुनाव में पटेल फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बहुजन समाज पार्टी की उम्मीदवार रामबाई गोविंद सिंह ने उन्हें 2,205 वोटों से हरा दिया। पटेल को 37,062 वोट मिले, जबकि रामबाई को 39,267 वोट मिले थे।
इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में लखन पटेल ने फिर वापसी की। बीजेपी ने उन्हें दोबारा पथरिया से टिकट दिया और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार राव ब्रजेंद्र सिंह को 18 हजार159 वोटों से हराकर जीत हासिल की। इस चुनाव में पटेल को 82 हजार 603 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 64 हजार 444 वोट मिले थे।
लखन सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीती में आए
मध्य प्रदेश के दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से विधायक लखन पटेल ने राजनीति में कदम रखने से पहले बैंकिंग क्षेत्र में लंबा समय काम किया। उन्होंने जबलपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय से 1978-79 में कृषि विषय में बीएससी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कई वर्षों तक नौकरी की। बाद में बैंक की नौकरी छोड़कर वे राजनीति में सक्रिय हो गए। अपने राजनीतिक सफर के दौरान लखन पटेल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष भी रह चूके है।
11 विभागों है सीएम मोहन यादव पास
मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास अब कुल 11 विभागों की जिम्मेदारी है। इनमें सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय और पशुपालन एवं डेयरी विभाग शामिल हैं। ये सभी ऐसे विभाग हैं, जिनकी जिम्मेदारी फिलहाल किसी और मंत्री के पास नहीं है। यानी इन विभागों का सीधा जिम्मा मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद संभाल रहे हैं।
गोशालाओं के लिए जमीन आवंटन मुसीबत बना
राजनीतिक जानकारों और सूत्रों का कहना यह भी है की मध्य प्रदेश में स्वावलंबी गोशालाएं शुरू होनी थीं। इनके लिए चुनी गई कई संस्थाओं की स्थिति से सरकार संतुष्ट नहीं थी। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों और मंत्री की सहमति से उन्हें काम देने की तैयारी की जा रही थी। पिछले तीन-चार महीने से सीएम इस मुद्दे पर मंत्री को कई बार समझा चुके थे।
स्वावलंबी गोशालाओं के लिए संस्थाओं को जमीन आवंटन के मामले की शिकायत संघ और बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंची थी। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है।