स्वरा भास्कर बोलीं- राम जन्मभूमि फैसले से दुखी हुई थी: आमिर, शाहरुख और सलमान समेत मुस्लिम दोस्तों से मांगी थी माफी; कहा- मैं बहुत शर्मिंदा हूं

नई दिल्ली। अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने 2019 के अयोध्या मामले पर बात की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया बताई। स्वरा ने कहा कि फैसला आने के बाद वह बहुत दुखी और परेशान थीं। उन्होंने अपने फोन में मौजूद कई मुस्लिम दोस्तों और परिचितों को मैसेज किया था। इनमें आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान और फहाद अहमद भी शामिल थे।

स्वरा बोलीं- मुझे अफसोस और शर्मिंदगी महसूस हुई
स्वरा ने यह बात द मिडनाइट आवर को दिए इंटरव्यू में कही। इंटरव्यू में उन्होंने पति फहाद अहमद के साथ अपनी लव स्टोरी के बारे में भी बात की। स्वरा ने बताया कि अयोध्या मामले में फैसला आने के बाद उन्होंने अपने मुस्लिम कॉन्टेक्ट्स को मैसेज किया था। उन्होंने कहा कि वह उन्हें बताना चाहती थीं कि वह फैसले से सहमत नहीं हैं और उन्हें इस बात का अफसोस है। कुछ लोगों ने उनके मैसेज का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह माफी मांगने की जरूरत नहीं है।

CAA-NRC प्रदर्शन के दौरान हुई थी फहाद से मुलाकात
स्वरा और फहाद की पहली मुलाकात 2019-20 में CAA और NRC के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई थी। दोनों मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मिले थे। इसके बाद दोनों सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर साथ काम करने लगे। स्वरा ने बताया कि उन्हें फहाद का काम करने का तरीका पसंद आया। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत बढ़ती गई। दोनों ने 16 फरवरी 2023 को कोर्ट मैरिज की थी।

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
अयोध्या जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए देने का आदेश दिया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया था।
2020 में भी बयान को लेकर विवाद हुआ था
अयोध्या फैसले को लेकर स्वरा भास्कर 2020 में भी विवादों में आई थीं। उन्होंने मुंबई के एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए थे। उनके बयान के खिलाफ अधिवक्ता अनुज सक्सेना ने आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल से मंजूरी मांगी थी।
अटॉर्नी जनरल ने कार्रवाई की मंजूरी नहीं दी
के.के. वेणुगोपाल ने इस मामले में मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वरा का बयान उनकी अपनी धारणा थी। उनके मुताबिक, बयान में सुप्रीम कोर्ट की संस्था को बदनाम करने वाली बात नहीं थी।
उन्होंने स्वरा के दूसरे बयान को भी सामान्य और अस्पष्ट बताया था। इसलिए इसे आपराधिक अवमानना का मामला नहीं माना गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी संपर्क किया था। उन्होंने भी मामले में सहमति देने से इनकार कर दिया था।