प्रदेश प्रकाश की ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर पत्थरबाजी का खतरा; लूट की नीयत से वारदात, अवैध कट से दोपहिया-मवेशियों की एंट्री

मयंक बाफना। झाबुआ। शनिवार रात दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेसवे पर वाहन पर हुई पत्थरबाजी की घटना ने एक बार फिर इस एक्सप्रेस वे से गुजरने वाले वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद ‘प्रदेश प्रकाश’ की टीम ने एक्सप्रेसवे के झाबुआ जिले के टिमरवानी से लेकर घटनास्थल तक जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई खामिया नजर आई।
NHAI द्वारा एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। ऐसे में जब कोई वाहन तेज गति से एक्सप्रेसवे पर सफर कर रहा हो और अचानक उस पर पत्थर फेंके जाएं, तो चालक का संतुलन बिगड़ने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि ऐसी परिस्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
पेट्रोलिंग के बावजूद हो रही पत्थरबाजी
एक्सप्रेसवे पर निगरानी के लिए ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाओं के दावे किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि लगातार पत्थरबाजी जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो इन निगरानी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े होना लाजमी है। शनिवार रात की घटना भी कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक्सप्रेसवे पर वाहनों को पत्थरबाजी का सामना करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

बेरोकटोक चल रहे दोपहिया वाहन
प्रदेश प्रकाश की टीम ने जब एक्सप्रेसवे की जमीनी स्थिति देखी तो एक और गंभीर पहलू सामने आया। एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होने के बावजूद कई स्थानों पर दोपहिया वाहन बेरोकटोक दिखाई दिए। टिमरवानी से धामनोद के बीच कई स्थानों पर ऐसे रास्ते और कट नजर आते हैं, जिनके जरिए स्थानीय लोग और दोपहिया वाहन एक्सप्रेसवे तक सीधे पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और मवेशी भी एक्सप्रेसवे पर घूम रहे
इन रास्तों से न केवल दोपहिया वाहन बल्कि मवेशी भी सीधे एक्सप्रेसवे पर पहुंच रहे है। कई स्थानों पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आवाजाही भी देखने को मिली। तेज गति से दौड़ते वाहनों के बीच अचानक किसी दोपहिया वाहन, पैदल व्यक्ति या मवेशी के सामने आ जाने से वाहन चालक के लिए स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण हो सकती है।
अवैध कट बंद करने के बाद भी खुल गया रास्ते
बताया जाता है कि कुछ स्थानों पर NHAI और पुलिस प्रशासन द्वारा ऐसे अवैध कट बंद करवाने की कार्रवाई पहले भी की गई है, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा रास्ते खुलने की स्थिति सामने आती रही है। एक्सप्रेसवे पर सीसीटीवी कैमरे और निगरानी व्यवस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल कैमरों के भरोसे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है? यदि किसी स्थान पर पत्थरबाजी हो रही है, अवैध कट से दोपहिया वाहन प्रवेश कर रहे हैं या मवेशी एक्सप्रेसवे पर पहुंच रहे हैं, तो इनको रोकने की जवाबदारी आखिर किसकी है?

छोटी-सी लापरवाही से हो सकता है गंभीर हादसा
दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेसवे देश के महत्वपूर्ण सड़क मार्गों में शामिल है। यहां वाहन चालक निर्धारित गति सीमा के भीतर लंबी दूरी तय करते हैं। ऐसे में मार्ग पर छोटी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। विशेषकर पत्थरबाजी जैसी घटना में चालक के पास प्रतिक्रिया देने के लिए कुछ ही सेकंड होते हैं।
जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही क्या है?
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों से टोल वसूली के साथ उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही क्या है? क्या पेट्रोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है? क्या संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है? क्या अवैध कट को स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है? और सबसे महत्वपूर्ण—पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और स्थायी कदम कब उठाए जाएंगे?
एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहनों की संख्या में कमी
इन सवालों के जवाब अब जरूरी हैं, क्योंकि एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाला हर वाहन चालक यह उम्मीद करता है कि निर्धारित गति से यात्रा करते समय उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभाई जाएगी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं का असर अब इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर भी दिखाई देने लगा है। झाबुआ जिले के इस हिस्से में एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहनों की संख्या में कमी होती जा रही है।

अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे
विशेषकर गुजरात की ओर से आने वाले कई यात्री रात के समय इस मार्ग पर सफर करने से घबराने लगे हैं। पत्थरबाजी, अवैध कट, दोपहिया वाहनों और मवेशियों की मौजूदगी जैसी परिस्थितियों के कारण वाहन चालक रात में इस मार्ग से गुजरने को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के भरोसे का भी है।
इस साल अब तक कितनी घटनाएं हो चुकीं है।
इससे पहले 8 सितंबर को रतलाम की एक कार पर पत्थरबाजी हुई थी… और इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी है।
पुलिस और प्रशासन ने कितने लोगों को आइडेंटीफाई किया और कार्रवाई की
इस मामले में पुलिस के हाथ खाली है क्योंकि यह घटना करने वाले आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोकल लोग ही रहते हैं जो कि पुलिस कि पकड़ में नहीं आते..
घटना को अंजाम देना वाला कोई गिराेह है या लोकल का इन्वॉलमेंट
यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के शरारती लोग ही है।
वारदात को अंजाम देने वालों का उद्देश्य क्या होता है, जैसे लुट, मारपीट या सिर्फ परेशान करने के लिए
वारदात को अंजाम देने का उद्देश्य यही है कि वहां अगर रुक जाता है तो लूटपाट हो जाए और उन्हें इससे कोई आर्थिक लाभ मिल जाए