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सुमित्रा महाजन का पत्र; लिखा- इंदौर के साथ हो रहा भेदभाव, पश्चिम रेलवे ने इंदौर को अनाथ समझ लिया : कांग्रेस बोली – पत्र स्थानीय सांसद की नाकामी का प्रमाण

इंदौर की 8 बार की सांसद और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन (ताई) ने पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामश्रय पांडे को सख्त ओर नाराजगी भरा पत्र लिखकर इंदौर की लगातार हो रही रेल उपेक्षा पर गहरी चिंता जताई है। सुमित्रा महाजन ने पत्र में साफ शब्दों में लिखा कि “ऐसा प्रतीत होता है कि पश्चिम रेलवे ने इंदौर को अनाथ समझ लिया है।” उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने और लगभग 40 लाख की आबादी के बावजूद इंदौर को उसकी जरूरत के अनुरूप रेल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। वहीं इस मामले में कांग्रेस का कहना है कि यह स्थानीय सांसद की नाकामी का स्पष्ट प्रमाण है।

सुमित्रा महाजन ने पत्र में लिखा कि इंदौर के लिए नई यात्री ट्रेनें शुरू करने के बजाय अन्य रेलवे जोनों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव भी वर्षों से लंबित पड़े हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे की जयपुर-इंदौर ट्रेन और पश्चिम मध्य रेलवे की रीवा-इंदौर ट्रेन के प्रस्ताव अब तक अधर में हैं। महाजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित मेमू सेवा का रैक इंदौर से हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई। पत्र में कहा गया कि शहर से आधुनिक मेमू रैक हटाकर उसकी जगह पुराने और बार-बार खराब होने वाले डेमू रैक चलाए जा रहे हैं। इससे ऐसा लगता है कि इंदौर के यात्रियों को दोयम दर्जे का माना जा रहा है। पत्र में ताई ने महू-उज्जैन के बीच लोकल ट्रेन सेवा शुरू करने और अयोध्या के लिए सीधी रेल सेवा उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई। उनका कहना है कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जो इंदौर की उपेक्षा को दर्शाते हैं।

पुणे-इंदौर ट्रेन लंबे समय से बंद

सुमित्रा महाजन ने कहा कि पुणे-इंदौर ट्रेन लंबे समय से बंद है, लेकिन उसे वैकल्पिक मार्ग से शुरू करने का प्रयास नहीं किया गया। वहीं अजमेर और ग्वालियर की ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पटना और गुवाहाटी ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है, जबकि त्रिवेंद्रम-इंदौर एक्सप्रेस, जिसकी उपयोगिता 625 प्रतिशत से अधिक है, उसके फेरों में भी वृद्धि नहीं की गई।

लाइन और प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं

सुमित्रा महाजन ने पत्र में लिखा कि लक्ष्मीबाई नगर में दो अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, महू में अतिरिक्त लाइन क्षमता और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। इसके बावजूद हर मांग पर केवल यह कहना कि लाइन और प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं हैं, उचित नहीं है। उन्होंने महाप्रबंधक को याद दिलाया कि उन्होंने हाल ही में स्वयं इस क्षेत्र का दौरा किया है, इसलिए वे वास्तविक स्थिति से भली-भांति परिचित हैं। पत्र के अंत में ताई ने लिखा कि कई बार ऐसा लगता है कि ऐसी अधूरी सुविधाओं से अच्छा तो कोई सुविधा ही नहीं होती। उन्होंने महाप्रबंधक से कहा कि वे एक सक्षम अधिकारी हैं और इन शब्दों के पीछे छिपी इंदौरवासियों की पीड़ा और भावना को अवश्य समझेंगे। साथ ही उम्मीद जताई कि शहर को उसकी आवश्यकता के अनुरूप रेल सुविधाएं दिलाने के लिए गंभीर पहल की जाएगी।

इंदौर की लगातार रेल उपेक्षा हुई

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया ने कहा कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष एवं इंदौर की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन का पत्र स्वयं इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में इंदौर की लगातार रेल उपेक्षा हुई है। सबसे बड़ा सवाल इंदौर के वर्तमान सांसद शंकर लालवानी की निष्क्रियता पर है। यदि इंदौर की आवाज़ संसद और रेलवे मंत्रालय तक प्रभावी ढंग से पहुंची होती, तो पूर्व सांसद को ऐसा पत्र लिखने की नौबत नहीं आती। यह मोदी सरकार की विफलता और स्थानीय सांसद की नाकामी का स्पष्ट प्रमाण है। इंदौर की जनता अब घोषणाएं नहीं, बल्कि नई ट्रेनें, बेहतर रेल सुविधाएं और अपने अधिकार का सम्मान चाहती है।

पत्र जो पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने लिखा…

 

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