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37 साल पुराने सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद का होगा अंत, 8 जुलाई को कोर्ट में पूरी होगी समझौते की प्रक्रिया

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे तथा ऊषा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर आपसी सहमति बन गई है। सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर लगभग 37 वर्षों से चल रहा है पारिवारिक विवाद अब ख़त्म होने वाला है। इस समझौते की औपचारिक प्रक्रिया 8 जुलाई को ग्वालियर जिला न्यायालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरी की जाएगी।

न्यायालय ने दिए निर्देश

न्यायालय के निर्देश के बाद दोनों पक्षों ने विवाद को आपसी सहमति से समाप्त करने का फैसला लिया है। समझौते का प्रार्थनापत्र जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। पिछली सुनवाई में अदालत ने 90 दिनों के भीतर विवाद का समाधान कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

1988-89 में शुरू हुआ था विवाद

संपत्ति विवाद की शुरुआत वर्ष 1988-89 में हुई थी, जब तत्कालीन केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया और उनकी तीनों बहनों के बीच पैतृक संपत्ति के अधिकार को लेकर मतभेद सामने आए। वर्ष 2001 में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद भी विवाद जारी रहा। वर्ष 2010 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बेटियों वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे ने ग्वालियर जिला न्यायालय में दावा दायर कर पैतृक संपत्ति में समान वैधानिक अधिकार की मांग की। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने अधिकार को लेकर अलग वाद दायर किया। मामला वर्षों तक जिला न्यायालय में लंबित रहने के बाद 2017 में ग्वालियर हाईकोर्ट पहुंचा।

देशभर में फैली है अरबों की संपत्ति

विवाद में शामिल सिंधिया राजघराने की संपत्तियां देश के कई शहरों में फैली हुई हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। इनमें ग्वालियर स्थित ऐतिहासिक जयविलास पैलेस, शिवपुरी के माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, दिल्ली का ग्वालियर हाउस, पुणे का पद्म विलास पैलेस, वाराणसी का सिंधिया घाट तथा गोवा स्थित विठोबा मंदिर सहित कई अन्य संपत्तियां शामिल हैं। 8 जुलाई को न्यायालय में समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राजघराना संपत्ति विवाद का मामला समाप्त होने की संभावना है।

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