संघ शताब्दी वर्ष में “पंच परिवर्तन” पर करेगा विशेष कार्य : आलोक कुमार

Rashtriya Swayamsevak Sangh के सह सरकार्यवाह Alok Kumar ने कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष में “पंच परिवर्तन” के पांच प्रमुख विषयों पर विशेष रूप से कार्य करेगा। इनमें कुटुंब प्रबोधन, स्व की भावना, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन विषयों के माध्यम से समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाएगा।

शिमला में आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए आलोक कुमार ने कहा कि पिछले वर्षों में देश की परिस्थितियों में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पहले जिन क्षेत्रों में लोगों को जाने में भय लगता था, वहां आज स्थिति काफी बदली है। उन्होंने कश्मीर के लाल चौक का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां कभी सार्वजनिक उत्सव मनाना कठिन था, वहीं अब लोग खुले रूप से नए साल का जश्न मनाते हैं।

उन्होंने संघ के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था और विभाजन के समय विस्थापित लोगों की सहायता के लिए तीन हजार से अधिक राहत शिविर लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि गोवा और हैदराबाद आंदोलनों में भी संघ की सक्रिय भूमिका रही है।

आलोक कुमार ने कहा कि संघ देश की सभी भाषाओं को राष्ट्रीय मानता है, जिससे उसे व्यापक स्वीकार्यता मिली है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे कठिन दौर से गुजरने वाले क्षेत्रों में भी संघ ने लगातार कार्य किया और “भारत माता की जय” को जन-जन का नारा बनाने में भूमिका निभाई।

उन्होंने पंच परिवर्तन के विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि कुटुंब प्रबोधन के तहत परिवारों को संस्कारवान और मजबूत बनाना आवश्यक है। “स्व” की भावना पर उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई देशों को अनाज तथा बिजली उपलब्ध करा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि शिमला जैसे शहर अत्यधिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने जल संरक्षण और नदियों को प्रदूषण से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस बार कुंभ में प्लास्टिक के बर्तनों के उपयोग पर रोक लगाने का निर्णय भी इसी दिशा में एक कदम है।

सामाजिक समरसता पर बोलते हुए आलोक कुमार ने कहा कि जाति आधारित भेदभाव मानवता के विरुद्ध है और समाज में सभी को समान दृष्टि से देखा जाना चाहिए। साथ ही नागरिक कर्तव्य बोध पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।

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