गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी भारतीय सेना की पशु टुकड़ी

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के दौरान एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिलेगा, जब भारतीय सेना की पशु टुकड़ी पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी। यह विशेष टुकड़ी देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और दुर्गम इलाकों में सैन्य अभियानों के दौरान जानवरों की महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करेगी। सेना के ये “मौन योद्धा” वर्षों से विभिन्न ऑपरेशनों में सैनिकों का अहम सहारा रहे हैं।
इस पशु टुकड़ी में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार ज़ांस्कर नस्ल के खच्चर, चार शिकारी पक्षी, 10 भारतीय नस्ल के श्वान और वर्तमान में सेवा में मौजूद छह पारंपरिक सैन्य श्वान शामिल होंगे। ये सभी जानवर विभिन्न परिस्थितियों में भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
सेना के अनुसार, यह टुकड़ी अपने परिचालन तंत्र में परंपरा, नवाचार और आत्मनिर्भरता का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है। टुकड़ी का नेतृत्व बैक्ट्रियन ऊंट करेंगे, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के लिए शामिल किया गया है।
मेरठ स्थित रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) सेंटर और कॉलेज द्वारा प्रशिक्षित सैन्य श्वान आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों का पता लगाने, सुरक्षा ड्यूटी, आपदा प्रतिक्रिया तथा खोज और बचाव अभियानों में सैनिकों की सहायता करते हैं। इन श्वानों को भारतीय सेना के सबसे भरोसेमंद और साहसी सहयोगी माना जाता है।
गणतंत्र दिवस परेड में पशु टुकड़ी की यह भागीदारी न केवल भारतीय सेना की बहुआयामी ताकत को दर्शाएगी, बल्कि यह भी बताएगी कि आधुनिक तकनीक के साथ-साथ परंपरागत संसाधनों की भूमिका आज भी कितनी अहम है।






