इंदौर में निकला मौन जुलूस: काले कपड़े पहनकर पहुंचीं महिलाएं; विजयवर्गीय बोले- 14 अगस्त देश का काला दिन

इंदौर। BJP महानगर इंदौर ने गुरुवार को विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन जुलूस निकाला और संगोष्ठी आयोजित कर विभाजन की त्रासदी को याद किया। कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, नगर प्रभारी राजेश सोलंकी सहित कई विधायक और पदाधिकारी शामिल हुए।
भाजपा कार्यालय से निकले मौन जुलूस में कार्यकर्ता हाथों में विभाजन विरोधी तख्तियां लेकर चल रहे थे। कई महिलाएं विरोध स्वरूप काले वस्त्रों में शामिल हुईं। संगोष्ठी से पहले अतिथियों ने विभाजन की विभीषिका पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।

14 अगस्त देश का काला दिन था : कैलाश विजयवर्गीय
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त 1947 देश के इतिहास का ऐसा दिन था, जब एक ओर आजादी का उत्सव था, वहीं दूसरी ओर विभाजन का असहनीय दर्द और लोगों की चीखें थीं।
उन्होंने कहा कि भारत माता ने जो पीड़ा उस समय सही, उसे भुलाया नहीं जा सकता। विजयवर्गीय ने 1929 में रावी के तट पर कांग्रेस नेताओं द्वारा लिए गए पूर्ण स्वराज के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाजन ने देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक एकता को गहरा आघात पहुंचाया।

बंद कमरे में तय हुई थी विभाजन की रेखा
विजयवर्गीय ने कहा कि 15 अगस्त को झंडावंदन के समय भी बहुत से लोगों को यह नहीं पता था कि विभाजन की सीमा रेखा क्या होगी। उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन बंद कमरे में बैठकर तय किया गया था। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल और कश्मीर के कुछ हिस्सों को भारत में बनाए रखने के लिए उनके संघर्ष को याद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विभाजन का दर्द झेलने वाले लोगों की पीड़ा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

विभाजन की स्मृतियों का होगा संकलन : शंकर लालवानी
सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि केंद्र सरकार ने विभाजन की विभीषिका से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए एक वेबसाइट बनाई है। इस उद्देश्य के लिए केंद्रीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें वे स्वयं सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने विभाजन की त्रासदी झेली है, उनकी स्मृतियों और अनुभवों का वीडियो के माध्यम से संकलन किया जा रहा है। इंदौर के ऐसे परिवार भी अपने अनुभव समिति को भेज सकते हैं।

यह केवल विभाजन नहीं, अमानवीय अत्याचार था : ईश्वर हिंदुजा
आरएसएस के वरिष्ठ नेता ईश्वर हिंदुजा ने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने अपनी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए असाधारण बलिदान दिए। उन्होंने कहा कि कई महिलाओं ने अत्याचार से बचने के लिए कुओं में कूदकर जान दे दी और अनेक परिवारों ने भयावह परिस्थितियों का सामना किया।
उन्होंने कहा कि उस दौर में बच्चों और महिलाओं पर जो अत्याचार हुए, वे केवल राजनीतिक विभाजन नहीं थे, बल्कि नृशंस और अमानवीय अत्याचार थे।
मानवता और सभ्यता का सबसे बड़ा विभाजन : अजित सिंह नारंग
वरिष्ठ समाजसेवी अजित सिंह नारंग ने कहा कि 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने की घोषणा उन लाखों निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए की, जिनकी जान इस त्रासदी में चली गई।
उन्होंने कहा कि यह केवल भौगोलिक सीमाओं का विभाजन नहीं था, बल्कि लोगों के दिलों में बसे प्रेम, स्नेह और विश्वास का विभाजन था। यह मानवता, मानव सभ्यता और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर गहरी चोट थी। उन्होंने कहा कि यह वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के टूटने का प्रतीक भी था।