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उज्जैन के पंडित ने निकाला था 15 अगस्त का मुहूर्त: लग्न कुंडली से बताया था शुभ समय; पढ़ें आजादी की कहानी

उज्जैन। भारत इस बार 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ था, लेकिन क्या आपको पता है कि आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख कैसे तय हुई? इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी उज्जैन से जुड़ी है। स्वतंत्रता की तारीख तय करने में उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, लेखक और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े पंडित सूर्यनारायण व्यास की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

पंडित व्यास ने ज्योतिषीय गणना के आधार पर 14 अगस्त की जगह 15 अगस्त को भारत की स्वतंत्रता के लिए अधिक शुभ बताया था। यह पूरा प्रसंग देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से भी जुड़ा हुआ बताया जाता है।

स्वतंत्रता से पहले जब अंग्रेजों के साथ सत्ता हस्तांतरण को लेकर बातचीत चल रही थी, तब भारत की आजादी के लिए 14 और 15 अगस्त की तारीखें सामने आई थीं। उस समय देश के भावी नेतृत्व में यह सवाल भी था कि औपचारिक रूप से स्वतंत्रता का कार्यक्रम किस दिन किया जाए।

शुभ मुहूर्त में विश्वास रखते थे डॉ. राजेंद्र प्रसाद
बताया जाता है कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ज्योतिष और शुभ मुहूर्त में विश्वास रखते थे। उन्होंने अपने विश्वस्त गोस्वामी गणेश दत्त महाराज के माध्यम से उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्यनारायण व्यास से इस संबंध में राय मांगी। पंडित व्यास को दिल्ली बुलाया गया और उनसे पूछा गया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारत को स्वतंत्रता किस तारीख को ग्रहण करनी चाहिए।

पंडित व्यास ने 15 अगस्त को बताया शुभ
कहा जाता है कि पंडित सूर्यनारायण व्यास ने पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं का अध्ययन करने के बाद 14 अगस्त की तुलना में 15 अगस्त को स्वतंत्रता के लिए अधिक अनुकूल बताया। उनके अनुसार 14 अगस्त की कुंडली में लग्न स्थिर नहीं था, जबकि 15 अगस्त का मुहूर्त भारत के लिए बेहतर माना गया। इसी आधार पर 15 अगस्त की तारीख को प्राथमिकता दी गई।

आधी रात को हुआ था पहला ध्वजारोहण

पंडित सूर्यनारायण व्यास के पुत्र और दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक तथा लेखक राजशेखर व्यास ने कई अवसरों पर इस प्रसंग का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, जब पंडित व्यास ने स्वतंत्रता का मुहूर्त निकाला तो उन्होंने सुझाव दिया कि यदि स्वतंत्रता का शुभ समय आधी रात को पड़ रहा है, तो उसी समय स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा और ध्वजारोहण किया जाना चाहिए। इसके बाद सुबह अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।

आधी रात में हुई संविधान सभा
15 अगस्त 1947 की शुरुआत से पहले यानी 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि में संविधान सभा की विशेष बैठक हुई। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण दिया और भारत ने स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी नई यात्रा शुरू की। लाल किले पर स्वतंत्र भारत का पहला प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू का ध्वजारोहण हालांकि 15 अगस्त की सुबह हुआ था। इस तरह आधी रात की संविधान सभा और अगले दिन सुबह का लाल किले का कार्यक्रम, दोनों स्वतंत्रता समारोह के ऐतिहासिक हिस्से बने।

संसद भवन के शुद्धिकरण की भी कही जाती है कहानी

पंडित व्यास से जुड़े संस्मरणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि उनकी सलाह पर स्वतंत्रता से पहले संसद भवन के शुद्धिकरण की प्रक्रिया कराई गई थी। लंबे समय तक अंग्रेजी शासन का केंद्र रहे भवन को स्वतंत्र भारत के लिए शुभ मुहूर्त में नए दौर की शुरुआत से पहले धार्मिक परंपराओं के अनुसार शुद्ध किया गया। इस प्रसंग का उल्लेख पंडित व्यास के जीवन और उनके योगदान से जुड़ी सामग्री में मिलता है।

1930 में ही कर दी थी भारत की आजादी की भविष्यवाणी

पंडित सूर्यनारायण व्यास का जीवन केवल ज्योतिष तक सीमित नहीं था। वे लेखक होने के साथ स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे। उपलब्ध जीवन परिचय और उनके बारे में लिखी गई पुस्तकों के अनुसार उनका जन्म 1902 में हुआ था और 1921 से वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए थे।

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राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी की थी
उनके बारे में एक चर्चित दावा यह है कि उन्होंने वर्ष 1930 में ही भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत अगस्त 1947 में स्वतंत्र होगा। इतना ही नहीं, उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के देश के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी की थी। बाद में जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के राष्ट्रपति बने तो इस भविष्यवाणी का किस्सा और भी चर्चित हो गया।

दूसरी बार राष्ट्रपति बनने की भी भविष्यवाणी का दावा

पंडित व्यास से जुड़ी कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि 1952 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्रपति पद पर दोबारा चुने जाने से पहले पंडित व्यास ने उनसे कहा था कि वे फिर राष्ट्रपति बनेंगे।

डॉ. प्रसाद ने पंडित व्यास को लिखा था पत्र 
जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए तो इस भविष्यवाणी का भी उल्लेख किया गया। बताया जाता है कि डॉ. प्रसाद ने पंडित व्यास को पत्र लिखकर उनकी पहले की भविष्यवाणी का उल्लेख किया था। यह प्रसंग पंडित व्यास की लोकप्रियता और ज्योतिषीय गणनाओं में उनके विश्वास को दर्शाने वाली चर्चित घटनाओं में शामिल है।

पाकिस्तान के लिए 14 अगस्त को लेकर भी जताई थी आशंका

भारत की स्वतंत्रता के साथ ही पाकिस्तान के गठन की तारीख को लेकर भी पंडित सूर्यनारायण व्यास की एक भविष्यवाणी का जिक्र मिलता है। जब भारत और पाकिस्तान के लिए 14 और 15 अगस्त की तारीखों पर विचार हुआ, तब पंडित व्यास ने पाकिस्तान के लिए 14 अगस्त के मुहूर्त को अनुकूल नहीं माना था।

अस्थिरता का संकेत दे रही थी कुंडली
उनके अनुसार उस दिन की ग्रह स्थिति और कुंडली पाकिस्तान के लिए अस्थिरता का संकेत देती थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि पाकिस्तान 14 अगस्त को अस्तित्व में आता है तो उसे लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है । पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ज्योतिष और मुहूर्त को लेकर पंडित व्यास जैसी मान्यताएं नहीं रखते थे। इसलिए पाकिस्तान के लिए 14 अगस्त की तारीख तय हुई।

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जिन्ना की पत्नी रतनबाई भी मानती थीं पंडित व्यास को

पंडित व्यास से जुड़े विवरणों में मोहम्मद अली जिन्ना की पत्नी रतनबाई का भी उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि रतनबाई पंडित व्यास की ज्योतिषीय विद्या में विश्वास रखती थीं। हालांकि 1929 में रतनबाई का निधन हो गया था, यानी भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता के समय वह जीवित नहीं थीं।

उज्जैन से जुड़ा आजादी का यह अध्याय

पंडित सूर्यनारायण व्यास का नाम उज्जैन के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा है। ज्योतिष, साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रियता ने उन्हें अपने दौर की विशिष्ट शख्सियत बनाया।

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