रेलवे जमीन अधिग्रहण पर किसानों की मांग: 90 लाख रुपए/हेक्टेयर से कम मुआवजा मंजूर नहीं; बाजार मूल्य के आधार पर भुगतान की मांग

धार। इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों ने मुआवजे की दर को लेकर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने गुरुवार को रेलवे मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम नायब तहसीलदार राजेश भिंडे को ज्ञापन सौंपकर भूमि का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर तय करने की मांग की।
जमीन का नया मूल्यांकन कराने की मांग
किसान महासंघ का कहना है कि क्षेत्र में जमीन की कीमत वर्गमीटर के हिसाब से लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक है। इसके बावजूद रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों को अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। महासंघ ने भूमि अधिग्रहण से पहले जमीन का पुनर्मूल्यांकन कराने और रेलवे भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 6(सी) के तहत कलेक्टर की शक्तियों का इस्तेमाल कर नया क्लस्टर बनाने की मांग की है।
90 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर और चार गुना मुआवजे की मांग
ज्ञापन में किसानों ने प्रति हेक्टेयर कम से कम 90 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग रखी है। साथ ही मध्यप्रदेश शासन के 22 अप्रैल 2026 के राजपत्र के अनुसार चार गुना मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले मुआवजे की दर और जमीन के मूल्यांकन को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
खेतों में लगाए जा रहे खूंटे, किसानों में नाराजगी
महासंघ के प्रदेश संगठन महामंत्री गोपाल पाटीदार ने कहा कि रेलवे परियोजना के लिए किसानों की जमीन का सर्वे किया जा रहा है और खेतों में खूंटे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने पंचायतों से भी भूमि अधिग्रहण को लेकर अनुमति नहीं देने की अपील की। पाटीदार ने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो महासंघ की ओर से सत्याग्रह आंदोलन किया जाएगा।
अभी प्रारंभिक सर्वे ही चल रहा : नायब तहसीलदार
नायब तहसीलदार राजेश भिंडे ने बताया कि फिलहाल रेलवे परियोजना के लिए प्रारंभिक सर्वे का काम चल रहा है। सर्वे में यह देखा जा रहा है कि किस किसान की कितनी जमीन और संपत्ति परियोजना से प्रभावित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी मुआवजे का वितरण नहीं किया जा रहा है। भूमि की गाइडलाइन और मूल्य निर्धारण भू-अर्जन अधिनियम की धारा 26 के तहत एसडीएम की बैठक में किया जाएगा।