मेघनगर में जली फसल और लाल दूषित पानी लेकर निकले ग्रामीण: प्रदूषण के खिलाफ 3 KM की रैली; बोले- फैक्ट्री हटाओ

झाबुआ। मेघनगर में औद्योगिक प्रदूषण की समस्या को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। सर्व समाज के आह्वान पर सैकड़ों ग्रामीणों ने करीब 3 किलोमीटर लंबी आक्रोश रैली निकाली।
प्रदर्शनकारी हाथों में प्रदूषण से खराब हुई फसल और बोरिंग से निकलने वाले लाल रंग के दूषित पानी की बोतलें लेकर पहुंचे। इस दौरान ‘फैक्ट्री हटाओ, मेघनगर बचाओ’ के नारे गूंजते रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी रैली में हिस्सा लिया।

हाथों में जली फसल और दूषित पानी लेकर किया प्रदर्शन
ग्रामीणों ने रैली के दौरान औद्योगिक प्रदूषण के कथित प्रभावों को सामने रखने के लिए जली हुई फसलें और लाल रंग का पानी बोतलों में भरकर प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषण के कारण क्षेत्र की खेती और भूजल प्रभावित हो रहा है। लोगों ने कहा कि प्रदूषण की समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ।

3 किलोमीटर पैदल चली रैली
आक्रोश रैली फूट तलाव से शुरू होकर बीईओ कार्यालय तक पहुंची। करीब 3 किलोमीटर तक ग्रामीण पैदल चले और पूरे रास्ते नारेबाजी करते रहे।
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा और रैली के दौरान अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखी।
कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधे सुनी समस्याएं
रैली के बीईओ कार्यालय पहुंचने के बाद कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना।
ग्रामीणों ने बताया कि भूजल दूषित होने के कारण उन्हें पीने के पानी के साथ घरेलू जरूरतों के लिए भी पानी खरीदना पड़ रहा है। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाने और दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की। कलेक्टर ने ग्रामीणों को उनकी समस्याओं के न्यायोचित और शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया।
एसपी और एसडीएम भी रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान एसपी देवेंद्र पाटीदार और एसडीएम अवधती प्रधान सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायतों को दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।