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महाकाल के लिए 7 दिन में बनाई 2 फीट की राखी: ॐ और त्रिपुंड से सजाया; पूरे सावन रखती हैं व्रत

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में हर उत्सव की शुरुआत महाकाल से होती है। रक्षाबंधन पर सबसे पहले राखी भगवान महाकाल को अर्पित करने की परंपरा है।

राखी तैयार करने वाली महिलाएं पूरे सावन व्रत-उपवास रखती हैं। एक सप्ताह की कड़ी मेहनत से बाबा महाकाल को ध्यान में रखकर विशेष राखियां हाथों से तैयार की जाती हैं। पर्व पर इन्हें विधि-विधान से बाबा को पहनाया जाता है।

महाकाल को अर्पित होगी 2 फीट की राखी
28 अगस्त को तड़के 3 बजे भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाएं बाबा महाकाल को राखी बांधेंगी। इसके लिए मंदिर के पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं एक हफ्ते  से राखी तैयार कर रही थीं। इस बार 2 फीट लंबी विशेष राखी बनाई गई है, जिसे भस्म अर्पण के बाद बाबा को पहनाया जाएगा।

क्या है राखी की खासियत
पुजारी आकाश गुरु ने बताया कि, बाबा महाकाल के लिए तैयार की गई विशेष राखी रेशमी कपड़े, आभूषण और रेशमी धागों से बनाई गई है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोरपंख और गौ माता को स्थान दिया गया है। कांच वर्क, रुद्राक्ष, त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड से सजी यह राखी बेहद आकर्षक है। राखी बनाते समय महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती हैं।

राखी बांधने तक मंत्रोच्चार होगा
महाकाल को राखी अर्पित करने के लिए पुजारी परिवार की महिलाएं रात 2 बजे मंदिर पहुंचती हैं। राखी बांधने तक वे मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना में लीन रहती हैं। बाबा को राखी बांधने के बाद प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलती हैं। इसके बाद घर लौटकर परिवार के भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाती हैं।

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