झाबुआ में नवई पर्व पर पहली फसल चढ़ाकर नमन: प्राचीन समय से लग रहा मेला; गुजरात-मध्यप्रदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

झाबुआ। लंबेला की पहाड़ियों पर प्राचीन छीतरी माता मंदिर स्थापित है। यहां मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खरीफ की फसल आने के बाद प्राचीन परंपरा के अनुसार ग्रामीण अपनी पहली फसल माताजी के मंदिर में चढ़ाते हैं। फसल चढ़ाने के बाद ही ग्रामीण उस फसल को ग्रहण करते हैं। आदिवासी भाषा में इस परंपरा को नवई पर्व कहा जाता है।
पहली फसल माताजी और बाबादेव को करते हैं अर्पित
परंपरा के अनुसार बड़वा द्वारा पूजा-अर्चना के साथ पहली फसल माताजी और बाबादेव को अर्पित की जाती है। इसके बाद ही ग्रामीण नई फसल का उपयोग करते हैं। ग्रामीणों के लिए यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं।
छीतरी माता मंदिर की पहाड़ियों पर लगता है मेला
लंबेला गांव की पहाड़ियों पर प्रतिवर्ष मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में झूला-चकरी के साथ खाद्य सामग्री की दुकानें भी बड़ी संख्या में लगती हैं। गुजरात और मध्यप्रदेश से आने वाले श्रद्धालु मेले में शामिल होते हैं।
ग्रामीणों की बैठक में तय होती है मेले की तारीख
पुरानी परंपरा के अनुसार मेले के आयोजन के लिए हर साल ग्रामीणों की बैठक होती है। बैठक में मेले की तारीख तय की जाती है। इसके बाद गांव-गांव मेले की तारीख की जानकारी संदेश के रूप में भेजी जाती है।