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उज्जैन में पालकी में विराजे काल भैरव: जयकारों से गूंजा सवारी मार्ग; केंद्रीय जेल में कैदियों ने बनाई रंगोली, फूलों से किया स्वागत

उज्जैन। डोल ग्यारस के अवसर पर नगर कोतवाल के रूप में पूजे जाने वाले भगवान काल भैरव की भव्य सवारी निकाली गई। शाम करीब 4 बजे भैरवगढ़ स्थित काल भैरव मंदिर से बाबा की सवारी पालकी में रवाना हुई। सवारी से पहले बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। परंपरा के अनुसार सिंधिया परिवार की ओर से बाबा को पगड़ी धारण कराई गई।

सवारी शुरू होने से पहले कलेक्टर और एसपी ने काल भैरव की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद पालकी के साथ सशस्त्र जवान, पुलिस बैंड, ढोल, ध्वज, घोड़े, बग्घी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे सवारी मार्ग पर बाबा के जयकारे गूंजते रहे।

जेल गेट पर हुआ बाबा का स्वागत
काल भैरव की सवारी मंदिर से निकलकर केंद्रीय जेल भैरवगढ़ पहुंची। यहां जेल प्रशासन की ओर से बाबा की अगवानी के लिए विशेष साज-सज्जा की गई थी। जेल अधीक्षक मनोज साहू ने पालकी में विराजित बाबा काल भैरव का पूजन और आरती की।

जेल गेट पर पुलिस बल की ओर से बाबा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद जेल परिसर के अंदर बड़ी संख्या में कैदियों ने बाबा के दर्शन किए।

कैदियों ने बनाई रंगोली, फूलों से किया स्वागत
बाबा की सवारी के आगमन को लेकर केंद्रीय भैरवगढ़ जेल के कैदियों ने विशेष तैयारी की। स्वागत के लिए जेल परिसर में रंगोली बनाई गई। पालकी पहुंचने पर कैदियों ने फूल बरसाकर बाबा का स्वागत किया। महिला कैदियों ने भजन प्रस्तुत किए।

सिद्धवट मंदिर भी पहुंची सवारी
पुजारी ओम प्रकाश गुरु के अनुसार डोल ग्यारस और भैरव अष्टमी पर परंपरा के अनुसार काल भैरव की सवारी निकाली जाती है। काल भैरव को भगवान महाकाल का सेनापति माना जाता है, इसलिए सवारी में पुलिस जवानों के साथ बैंड, ढोल, ध्वज, घोड़े और बग्घी भी शामिल रहते हैं।

सवारी काल भैरव मंदिर से निकलकर जेल चौराहा, नाका चौराहा, माणक चौक होते हुए सिद्धवट मंदिर पहुंची और इसके बाद निर्धारित मार्ग से वापस काल भैरव मंदिर पहुंची।

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