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Tata Sons में चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन पर विवाद: बोर्ड ने 5 साल के लिए फिर चुना; Tata Trusts ने फैसले को बताया ‘अमान्य’

नई दिल्ली। Tata Sons में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर विवाद सामने आया है। कंपनी के बोर्ड ने उन्हें 5 साल के लिए फिर से एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाने की मंजूरी दी है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है।

वहीं, Tata Trusts ने उनकी दोबारा नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। Trusts ने इस फैसले को ‘अमान्य’ बताया है। Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने भी चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया था।

एक महीने पहले चंद्रशेखरन ने कही थी अलग बात
अगस्त में चंद्रशेखरन ने Tata Sons के बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद चेयरमैन पद के लिए दोबारा नाम नहीं देंगे। Tata Trusts ने भी उस समय उनके फैसले को स्वीकार किया था और नए चेयरमैन की तलाश के लिए चयन समिति बनाने की बात कही थी। अब बोर्ड ने उन्हें एक और 5 साल का कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव की वजह अभी स्पष्ट नहीं है।

नोएल टाटा ने किया विरोध
Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया। Trusts की ओर से चेयरमैन पद पर बदलाव की इच्छा पहले भी सामने आई थी।

अब Trusts की आपत्ति के बाद Tata Sons के अंदर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी है।

2017 में संभाली थी टाटा ग्रुप की कमान
एन चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले उन्होंने TCS में लंबे समय तक काम किया। उन्होंने 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर करियर शुरू किया था।

उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया।

9 साल में बढ़ा ग्रुप का कारोबार
चंद्रशेखरन के चेयरमैन बनने के बाद टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के कारोबार और बाजार मूल्य में बढ़ोतरी हुई।

  • रेवेन्यू: FY2020 में ₹7.89 लाख करोड़ से बढ़कर FY2026 में ₹16.24 लाख करोड़
  • मुनाफा: ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़
  • लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप: ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर ₹24.39 लाख करोड़

Tata Group, Tata Sons और Tata Trusts में अंतर

  • Tata Group: टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का समूह है। इसमें TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power और Air India जैसी कंपनियां शामिल हैं।
  • Tata Sons: यह टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। इसकी कई बड़ी टाटा कंपनियों में हिस्सेदारी है।
  • Tata Trusts: यह सामाजिक और परोपकारी ट्रस्टों का समूह है। Tata Sons में इनकी करीब 66% हिस्सेदारी है।

अब आगे क्या?
फिलहाल चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर Tata Sons बोर्ड और Tata Trusts के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। Tata Trusts ने फैसले की वैधता पर सवाल उठाया है। आगे यह विवाद बोर्ड और कानूनी स्तर पर किस तरह बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी।

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