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विमुक्त-घुमंतू समुदायों के लिए जॉइंट एक्शन प्लान: सरकारी योजनाएं और सामाजिक संस्थाओं के प्रयास जुड़ेंगे; शिक्षा-रोजगार पर फोकस

भोपाल। विमुक्त, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदायों के विकास के लिए सरकारी योजनाओं और सामाजिक संस्थाओं के जमीनी नवाचारों को जोड़कर बहुआयामी ‘जॉइंट एक्शन प्लान’ तैयार किया जाएगा। इसमें समुदायों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर जीवन स्तर से जोड़कर आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई जाएगी।

यह बात पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में कही।

शासन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर करेंगी काम
आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित कार्यशाला का आयोजन संचालनालय, विमुक्त, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदाय विकास द्वारा किया गया। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि सामाजिक संस्थाएं सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद जमीनी स्तर पर बेहतर काम कर रही हैं। ऐसे प्रयासों और सरकारी योजनाओं को एक मंच पर लाकर वंचित वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में काम किया जाएगा।

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
पद्मश्री भीकू रामजी ईदाते ने कहा कि इन समुदायों के विकास के लिए घर-घर जाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने महाराष्ट्र की तर्ज पर मध्यप्रदेश में आश्रम शालाएं और शोध केंद्र शुरू करने तथा राज्य, जिला और तहसील स्तर पर संयुक्त समितियां गठित करने का प्रस्ताव रखा।

विकास बोर्ड के अध्यक्ष बाबूलाल बंजारा ने बताया कि पात्र नागरिकों को जाति प्रमाण पत्र और आवास उपलब्ध कराने के लिए सर्वेक्षण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बस्ती विकास और छात्रावास अनुदान राशि में वृद्धि के लिए राज्यमंत्री का आभार जताया।

शिक्षा और स्वरोजगार पर रहेगा फोकस
कार्यशाला में जन अभियान परिषद, ‘सीड’ योजना, ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने के साथ ‘बडी फॉर स्टडी’ और ‘उड़ान प्रोजेक्ट’ जैसी शैक्षणिक पहलों को जोड़ने पर चर्चा हुई। बेड़िया, नट-नागर और लोह पीट जैसे समुदायों के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।

लोक संस्कृति के संरक्षण पर भी जोर
सामाजिक चिंतक गोरेलाल जी ने समुदायों की मूलभूत समस्याओं रोटी, कपड़ा, मकान और स्वरोजगार के स्थायी समाधान की जरूरत बताई। उन्होंने इनके लोकगीतों और लोककथाओं के संरक्षण को भी जरूरी बताया।

कार्यशाला में पद्मश्री भीकू रामजी ईदाते, सामाजिक चिंतक गोरेलाल जी, भारत सरकार के DWBDNC संचालक रहीस एम, विकास बोर्ड के अध्यक्ष बाबूलाल बंजारा, संचालक बुद्धेश कुमार वैद्य, विभागीय अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और प्रदेशभर से आए स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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