उत्तराखंड में मदरसों पर सख्ती: नए नियमों से सैकड़ों संस्थानों पर बंद होने का खतरा

उत्तराखंड में मदरसों को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए अब सभी मदरसों के लिए शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में संचालित मदरसों में मनमाने पाठ्यक्रम पर रोक लग जाएगी और उन्हें सरकारी नियमों के तहत ही संचालन करना होगा।
पुष्कर सिंह धामी की सरकार के इस फैसले से राज्य के सैकड़ों मदरसों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में संस्थान अभी तक निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
सरकार के नए नियमों के अनुसार, कक्षा 8 तक के मदरसों को जिला विद्यालय समिति से मान्यता लेनी होगी, जबकि इंटर स्तर तक के लिए राज्य शिक्षा बोर्ड में आवेदन करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा 1 जुलाई से सभी मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से संबद्धता भी लेनी होगी।
राज्य में पहले उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के तहत 452 मदरसे पंजीकृत थे, जिनकी मान्यता 30 जून को समाप्त हो रही है। सरकार ने इस बोर्ड को ही समाप्त कर दिया है। वहीं 192 मदरसे सरकारी सहायता प्राप्त थे और वक्फ बोर्ड के तहत 117 मदरसे पंजीकृत थे। इन सभी में करीब 46 हजार छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे थे।
सरकारी सर्वे में राज्य में लगभग 950 मदरसे चिन्हित किए गए थे, जिनमें से करीब 300 बिना अनुमति के संचालित हो रहे थे। इन अवैध मदरसों पर पहले ही कार्रवाई करते हुए ताला लगाया जा चुका है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अन्य राज्यों से बच्चों को लाकर मदरसों में पढ़ाया जा रहा था। साथ ही फर्जी दस्तावेज और पहचान छिपाने जैसे मामलों की भी जानकारी मिली, जिस पर बाल संरक्षण आयोग ने गंभीरता से रिपोर्ट भेजी थी।
अब सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मदरसों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी। धार्मिक शिक्षा भी दी जा सकती है, लेकिन उसका पाठ्यक्रम निर्धारित नियमों के तहत ही होगा।
मान्यता के लिए मदरसों को भूमि, भवन, प्रशिक्षित शिक्षक (बीएड), खेल मैदान और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। साथ ही वित्तीय पारदर्शिता के तहत बैंक खातों, चंदा और आर्थिक स्रोतों का ऑडिट भी जरूरी होगा।
विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, सरकार का उद्देश्य सभी बच्चों को समान शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जो मदरसे निर्धारित मानकों और दस्तावेजों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
राज्य सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे भविष्य में छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद मिल सकती है।






