उज्जैन में रामघाट की आरती से पंडा समिति को हटाने का विरोध: आज शाम 4 बजे से जल सत्याग्रह करेंगे; टेंडर-VIP व्यवस्था का भी विरोध

उज्जैन। रामघाट पर क्षिप्रा आरती को लेकर विवाद हो गया। तीर्थ पुरोहितों ने महाकाल मंदिर समिति की ओर से रामघाट पर आरती कराए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रामघाट पर वर्षों से तीर्थ पुरोहित अपने स्तर पर नियमित रूप से आरती और धार्मिक आयोजन कराते आ रहे हैं। ऐसे में मंदिर समिति द्वारा यहां अलग से आरती कराने की जरूरत और उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि रामघाट पर होने वाली धार्मिक गतिविधियों में प्रशासनिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि महाकाल मंदिर समिति रामघाट पर पूजन और आरती की व्यवस्था में भूमिका निभाती है, तो हमें भी महाकालेश्वर मंदिर में अभिषेक और पूजन का अधिकार दिया जाए।
आज शाम 4 बजे से जल सत्याग्रह
आरती से हटाए जाने के विरोध में अब पंडा समिति ने आंदोलन का ऐलान किया है। समिति के सदस्य आज शाम 4 बजे से रामघाट पर जल सत्याग्रह करेंगे। पंडा समिति का कहना है कि रामघाट की आरती और धार्मिक परंपराओं में वर्षों से तीर्थ पुरोहितों की भूमिका रही है, जिसे समाप्त करने का विरोध किया जाएगा।

आरती के टेंडर पर भी सवाल
पुरोहितों ने क्षिप्रा नदी की आरती के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिन तीर्थ पुरोहित परिवारों के पास वर्षों पुरानी पोथियां और धार्मिक परंपराओं से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद हैं, उनकी भूमिका और परंपरागत अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उनका आरोप है कि धार्मिक आस्था से जुड़े आयोजनों को टेंडर या ठेके की प्रक्रिया से संचालित करना उचित नहीं है। पुरोहितों ने आशंका जताई कि यदि इसी तरह व्यवस्थाएं बदली गईं तो भविष्य में अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर भी व्यावसायिक मॉडल अपनाया जा सकता है।

एसडीएम के घाट पर पहुंचने पर भी सवाल
पुरोहितों ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पिछले दो दिनों से एसडीएम के रामघाट पहुंचकर आरती की व्यवस्था में शामिल होने की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को लगातार घाट पर आरती की व्यवस्था के लिए आना पड़ रहा है।
VIP व्यवस्था लागू होने की आशंका
तीर्थ पुरोहितों ने यह भी आशंका जताई कि भविष्य में रामघाट की आरती के लिए शुल्क, VIP व्यवस्था या विशेष दर्शन जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में घाट पर आरती के लिए श्रद्धालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है और धार्मिक आयोजन को व्यवसायिक गतिविधि में नहीं बदला जाना चाहिए।
प्रशासन से विवाद खत्म करने की मांग
तीर्थ पुरोहितों ने सत्ता और प्रशासन से धार्मिक आयोजनों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने और परंपरागत व्यवस्थाओं का सम्मान करने की मांग की है। उनका कहना है कि धर्म और आस्था से जुड़े आयोजनों को इवेंट के रूप में संचालित करने के बजाय स्थानीय परंपराओं और वर्षों से धार्मिक कार्य कर रहे पुरोहितों की भूमिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।