थांदला में 54 उपवास की तपस्या पूर्ण: आरती लवी श्रीश्रीमाल ने रचा इतिहास; संघ ने ‘विशिष्ट तप आराधिका’ से किया सम्मान

थांदला। वर्षावास के दौरान धर्म और तप आराधना का माहौल बना हुआ है। धर्मनिष्ठ सुश्राविका आरती लवी श्रीश्रीमाल ने 54 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण की। श्रीसंघ के अनुसार, थांदला के ज्ञात इतिहास में पहली बार किसी तपस्वी ने 54 उपवास की तपस्या पूर्ण की है।
54 दिन तक की कठोर तपस्या
जैन परंपरा में तपस्या को कर्म निर्जरा का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। आरती श्रीश्रीमाल ने 54 दिनों तक सीमित मात्रा में केवल गर्म जल के आधार पर यह तपस्या पूर्ण की। इससे पहले भी वे दो मासक्षमण सहित कई प्रकार की तपस्याएं कर चुकी हैं।
वर्षावास के दौरान थांदला में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं तप आराधना कर रहे हैं। नन्ही प्रिशा अमित शाह और चार्मी श्रेयांश बाठिया ने भी 11-11 उपवास की तपस्या की है। संघ के अनुसार अब तक 13 मासक्षमण सहित कई अन्य तपस्याएं पूर्ण हो चुकी हैं।
सादगी से निकली जयकार यात्रा
54 उपवास पूर्ण होने पर श्रीसंघ की ओर से सादगीपूर्ण जयकार यात्रा निकाली गई। यात्रा संघ के वरिष्ठ रमेशचंद्र श्रीश्रीमाल के आवास से शुरू होकर महावीर भवन पहुंची। इस दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्वी और गुरुभगवंतों के जयकारे लगाए।
महावीर भवन में आयोजित गुणानुवाद सभा में तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी, रोचकवक्ता श्री संदीपमुनिजी और पूज्या श्री निखिलशीलाजी ने तपस्या के महत्व पर प्रवचन दिए। उन्होंने तपस्वी के तप का अनुमोदन करते हुए परिवारजनों के सहयोग की भी सराहना की।
‘विशिष्ट तप आराधिका’ से किया सम्मान
श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने संघ की ओर से आरती श्रीश्रीमाल को ‘विशिष्ट तप आराधिका’ के अलंकरण से सम्मानित किया। साथ ही बाल तपस्वियों प्रिशा और चार्मी सहित अन्य तपस्वियों की भी प्रशंसा की गई।
धर्मदास गण के अध्यक्ष भरत भंसाली और हेमंत श्रीश्रीमाल ने भी अपने विचार रखे। श्रीसंघ और विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों व सदस्यों ने तपस्वी के निवास पर पहुंचकर तपस्या की अनुमोदना की।
अन्य तपस्वियों का भी हुआ बहुमान
कार्यक्रम में पूर्व में तपस्या पूर्ण कर चुके तपस्वियों का भी बहुमान किया गया। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से अभिनंदन पत्र भेंट किए गए। विभिन्न परिवारों और संस्थाओं ने भी तपस्वी का सम्मान किया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीसंघ सचिव हितेश शाह ने किया। संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि वर्षावास के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं धर्म और तप आराधना में शामिल हो रहे हैं।