धार में सोयाबीन पर मौसम की मार: बारिश कम होने से कीटों का प्रकोप: उत्पादन में 50-60% गिरावट; रबी की बोवनी को लेकर भी चिंता

धार। जिले में इस बार बारिश की कमी का असर खरीफ की प्रमुख नकदी फसल सोयाबीन पर दिखाई देने लगा है। जिले की औसत बारिश करीब 33 इंच है, जबकि इस सीजन में अब तक करीब 20 इंच बारिश ही दर्ज हुई है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने के साथ फसल में पीला मोजेक, सफेद मक्खी, मकड़ी और अन्य रसचूसक कीटों का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को इस बार सोयाबीन के उत्पादन में 50 से 60 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका है।
दाना नहीं भरने से उत्पादन पर असर
लंबी अवधि वाली सोयाबीन फसल में इस समय फलियों में दाना भरने की प्रक्रिया चल रही है। कम नमी और रोग-कीटों के कारण कई क्षेत्रों में पौधों की वृद्धि प्रभावित हुई है। फलियों में अपेक्षित दाना विकास नहीं होने से उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है।
भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री अमोल पाटीदार के अनुसार कम बारिश और रोग-कीटों के प्रकोप से सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में पीला मोजेक और रसचूसक कीट तेजी से फैल रहे हैं। इससे पौधों की वृद्धि के साथ फलियों में दाना भरने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
जलस्रोतों में भी कम पानी
किसानों के सामने सिर्फ खरीफ फसल का संकट नहीं है, बल्कि आगामी रबी सीजन में सिंचाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कम बारिश के कारण जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं बचा है। भूजल स्तर में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से किसानों को रबी की बोवनी के बाद सिंचाई की उपलब्धता को लेकर चिंता है।
कम पानी वाली फसलों का करें चयन
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएस चौहान ने बताया कि कम बारिश के कारण भूजल स्तर में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में किसानों को रबी सीजन में अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय कम सिंचाई में तैयार होने वाली फसलों का चयन करना चाहिए।
उन्होंने सीमित नमी वाले क्षेत्रों में चना और मसूर की बोवनी को उपयुक्त बताया। गेहूं की बोवनी करने वाले किसान कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली लोकवान या तेजस जैसी किस्मों का चयन कर सकते हैं। इसके अलावा तिलहन में सूरजमुखी भी कम पानी में खेती के लिए विकल्प हो सकता है।