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सिंहस्थ-2028 के बीच धर्मस्थलों के चौड़ीकरण पर मंथन: शहर काजी बोले- सैकड़ों साल पुराने स्थलों को बचाएं; शाही मस्जिद पर भी चर्चा

उज्जैन। सिंहस्थ 2028 को लेकर उज्जैन में वर्तमान में सैकड़ों विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसी कड़ी में सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे विभिन्न धर्मस्थलों को लेकर मंगलवार को जिला प्रशासन ने एक अहम बैठक बुलाई। नुमायंदे कमेटी के करीब एक दर्जन सदस्यों और शहर काजी की उपस्थिति में हुई इस चर्चा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की। बैठक में प्रशासन की ओर से अतिक्रमण की सीमा में आने वाले धर्मस्थलों की एक सूची भी कमेटी को सौंपी गई है, जिस पर अब आगे की कार्रवाई को लेकर मंथन किया जा रहा है।

शहर काजी की प्रशासन को नसीहत और कमेटी का रुख
बैठक के संपन्न होने के बाद शहर काजी खलीकुर्रहमान ने प्रशासन को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि अधिकारियों को अपना चश्मा ठीक रखना चाहिए, ताकि किसी को भी बार-बार कुछ कहने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने मीडिया को बताया कि प्रशासन की तरफ से धार्मिक स्थलों को लेकर कुछ प्रस्ताव रखे गए हैं। अब यह कमेटी इन सभी प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करेगी और उसके बाद ही अपना आधिकारिक जवाब प्रशासन को सौंपेगी।

शाही मस्जिद मामले और अदालती प्रक्रिया पर बयान
चर्चा के दौरान शाही मस्जिद मामले का जिक्र करते हुए शहर काजी ने कोर्ट से स्टे नहीं मिलने की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन जिम्मेदार लोगों को इस मामले में अदालत का रुख करना चाहिए था, वे आगे नहीं आए, बल्कि कुछ नादान बच्चे अदालत चले गए थे। काजी के मुताबिक, अदालत में जो आवेदन प्रस्तुत किया गया था, वह भी सही तरीके से प्रारूपित नहीं था। यही कारण है कि इस कानूनी मामले पर फिलहाल उनका अधिक कुछ कहना उचित नहीं है।

सैकड़ों साल पुराने धार्मिक स्थलों को संरक्षित करने की अपील
धर्मस्थलों के भविष्य को लेकर शहर काजी खलीकुर्रहमान ने प्रशासन से पूरी तरह निष्पक्ष कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, यह पूरी तरह से प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगा और फिलहाल अदालत जाने का कोई नया निर्णय नहीं लिया गया है। काजी ने जोर देकर कहा कि उज्जैन शहर के कई धार्मिक स्थल सैकड़ों साल पुराने हैं, इसलिए विकास कार्यों के बीच इन्हें नष्ट करने के बजाय संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने शाही मस्जिद का उदाहरण देते हुए उसकी उम्र लगभग 650 साल पुरानी बताई और प्रशासन को पुनः चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी नीतियों और नजरिए को दुरुस्त रखें ताकि शहर की धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके।

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