पति-पत्नी और दो बच्चें करने वाले थे आत्महत्या: किडनी के इलाज में खत्म हुए सारे पैसे,अब रोज कमा रही एक हजार; बोलीं- कलेक्टर ही मेरे भैया

इंदौर। “हफ्ते में तीन बार डायलिसिस होता है। इलाज में घर का सब कुछ बिक गया। रिश्तेदारों और परिवार ने भी साथ छोड़ दिया। दो बच्चों के साथ अकेली द्वारिका को कोई काम नहीं दे रहा था।”
द्वारिका प्रजापति ने बताया कि उनके पति जेसीबी ऑपरेटर थे। लंबे समय तक दर्द की दवाइयां खाने से पांच साल पहले उनकी दोनों किडनी खराब हो गईं, अब लीवर भी खराब है।
आर्थिक तंगी से परेशान होकर पति-पत्नी और दो बच्चों सहित पूरा परिवार आत्महत्या करने वाला था लेकिन जनसुनवाई में उनकी परेशानी सुनकर कलेक्टर ने उनकी मदद की और आज पूरा परिवार आत्मसम्मान के साथ जीवनयापन कर रहा है।
पैसे खत्म होने पर लिया आत्महत्या का निर्णय
द्वारिका ने बताया कि पैसों की इतनी तंगी हो गई कि अस्पताल जाना भी मुश्किल हो गया। तब पूरे परिवार ने आत्महत्या करने का मन बना लिया। जब जनसुनवाई में कलेक्टर को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल मदद करते हुए पति के इलाज की व्यवस्था करवाई और द्वारिका को रोजगार के लिए दुकान और ठेला शुरू करवाया।
हमारा कोई नहीं है, कलेक्टर ही मेरे भैया
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि द्वारिका बहुत परेशान थीं, उनके मामले में स्वास्थ्य और रोजगार दोनों तरह की मदद की गई, जिससे आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं। आज वही द्वारिका अपने हाथों से बना खाना टिफिन में लेकर कलेक्टर को धन्यवाद देने पहुंची। वह अब रोज 1000 रुपये कमा रही है। भावुक होते हुए बोली, “हमारा कोई नहीं है, कलेक्टर साहब ही मेरे भैया हैं। जिन्होंने मौत के कगार पर खड़े परिवार को जीने का हौसला दिया।”