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सर गारफील्ड सोबर्स को लॉर्ड्स में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, भारत-इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने ब्लैक आर्मबैंड पहनकर किया सम्मान

भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरे वनडे मुकाबले से पहले लॉर्ड्स में भावुक पल देखने को मिला। दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने ब्लैक आर्मबैंड पहनकर और एक मिनट का मौन रखकर महान वेस्टइंडीज़ ऑलराउंडर सर गारफील्ड सोबर्स को श्रद्धांजलि अर्पित की।

भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले की शुरुआत एक भावुक माहौल में हुई। मैच शुरू होने से पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने महान वेस्टइंडीज़ क्रिकेटर सर गारफील्ड सोबर्स के सम्मान में अपनी बांह पर ब्लैक आर्मबैंड बांधा और एक मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में शुमार सोबर्स का हाल ही में 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया था, जिसके बाद पूरी क्रिकेट बिरादरी शोक में है।

क्या हुआ? तीसरे वनडे से पहले लॉर्ड्स में महान क्रिकेटर को दी गई श्रद्धांजलि

भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरे वनडे की शुरुआत से पहले लॉर्ड्स मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ी ब्लैक आर्मबैंड पहनकर मैदान में उतरे। टॉस के बाद मैच शुरू होने से पहले खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों ने एक मिनट का मौन रखा। इस दौरान स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने भी महान क्रिकेटर के सम्मान में मौन रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह सम्मान सर गारफील्ड सोबर्स के क्रिकेट में अतुलनीय योगदान को याद करते हुए दिया गया।

कौन थे सर गारफील्ड सोबर्स? बारबाडोस से निकलकर बने विश्व क्रिकेट के महानतम ऑलराउंडर

सर गारफील्ड सोबर्स का जन्म 28 जुलाई 1936 को ब्रिजटाउन, बारबाडोस में हुआ था। उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में 1954 में वेस्टइंडीज़ के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और 1974 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। लगभग दो दशक लंबे करियर में उन्होंने 93 टेस्ट मैचों में 8,032 रन बनाए और 235 विकेट लिए। 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ उनकी नाबाद 365 रन की पारी कई वर्षों तक टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर रही। क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें 1975 में ‘सर’ (Knighthood) की उपाधि से सम्मानित किया गया।

कब और कहां बनाई अपनी पहचान?  दो दशक तक दुनिया के हर बड़े मैदान पर बिखेरा अपना जलवा

बारबाडोस से निकलकर सर गारफील्ड सोबर्स ने 1954 से 1974 तक विश्व क्रिकेट पर अपना दबदबा बनाए रखा। उन्होंने इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, भारत और पाकिस्तान सहित दुनिया के प्रमुख क्रिकेट देशों में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी, बाएं हाथ की स्पिन और बेहतरीन फील्डिंग ने उन्हें अपने दौर का सबसे संपूर्ण खिलाड़ी बना दिया।

क्यों थे इतने लोकप्रिय? रिकॉर्ड, बहुमुखी प्रतिभा और खेल के प्रति समर्पण ने बनाया महान

सर गारफील्ड सोबर्स को क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर माना जाता है। वह ऐसे दुर्लभ खिलाड़ी थे जो नई गेंद से तेज गेंदबाजी करने के साथ-साथ स्पिन गेंदबाजी में भी समान रूप से प्रभावी थे। बल्लेबाजी में उनकी आक्रामक शैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले वह दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और खेल भावना ने उन्हें दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों का चहेता बना दिया।

कैसे हुआ निधन?  89 वर्ष की आयु में दुनिया को कहा अलविदा, क्रिकेट जगत में शोक की लहर

सर गारफील्ड सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के बाद क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई। दोनों टीमों ने यह संदेश दिया कि महान खिलाड़ियों की विरासत सिर्फ रिकॉर्ड्स तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाती है। सर गारफील्ड सोबर्स का नाम भी हमेशा क्रिकेट इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।

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