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समस्या निवारण शिविर भी बने औपचारिकता: कर्मचारी समाधान के लिए अब भी लगा रहे चक्कर; आवेदन और आश्वासन तक सिमटी कार्रवाई

इंदौर। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए विकासखंड शिक्षा कार्यालयों (बीईओ) में लगाए जा रहे ‘समस्या निवारण शिविर’ सवालों के घेरे में हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के निर्देश पर हर शनिवार दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक शिविर लगाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं का विकासखंड स्तर पर समाधान करना और उन्हें वरिष्ठ कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना है। हालांकि, कई प्रकरण अब भी लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं और कर्मचारी समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन का सहारा ले रहे हैं।

चार साल पुरानी शिकायत से सामने आई व्यवस्था की हकीकत
शिविरों की कार्यप्रणाली पर सवाल हाल ही में कलेक्टर शिवम वर्मा की सीएम हेल्पलाइन समीक्षा के दौरान सामने आए एक मामले से भी उठे। विजय नगर शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल की एक शिक्षिका की करीब चार साल पुरानी शिकायत समीक्षा में सामने आई। शिक्षिका वर्ष 2016 में सेवानिवृत्त हुई थीं। पेंशन शुरू होने के बावजूद वरिष्ठता तय नहीं होने के कारण उन्हें कम पेंशन मिल रही थी।

वर्ष 2023 में न्यायालय ने वरिष्ठता तय कर पेंशन जारी करने के आदेश दिए थे, लेकिन इसके बाद भी प्रकरण का निराकरण नहीं हुआ। कलेक्टर ने शिक्षिका को कार्यालय बुलाकर मामले की जानकारी ली।

नियुक्ति दिनांक गलत दर्ज होने की बात सामने आई
समीक्षा के दौरान नियुक्ति दिनांक गलत दर्ज होने और स्वत्वों का समय पर भुगतान नहीं किए जाने की स्थिति सामने आई। मामले में कार्रवाई नहीं होने के कारण शिक्षिका को अब तक पूरा पेंशन लाभ नहीं मिल सका। कलेक्टर ने मामले में लेखापाल मुकुंद जमरा को निलंबित करने और प्राचार्य शबाना शेख को शोकॉज नोटिस देने के निर्देश दिए।

एक संकुल में 80 से 90 प्रकरण लंबित
जिला शिक्षा अधिकारी के 11 अगस्त के पत्र में भी कर्मचारियों के विभिन्न लंबित स्वत्वों का समय पर निराकरण नहीं होने के कारण उन्हें वरिष्ठ कार्यालयों तक जाना पड़ने की बात कही गई है। इंदौर विकासखंड शिक्षा कार्यालय के तहत 37 संकुल आते हैं। बताया गया है कि एक संकुल में ही शिक्षक और कर्मचारियों के करीब 80 से 90 अलग-अलग प्रकरण लंबित हैं।

ऐसे में यदि समस्या निवारण शिविरों में लंबित प्रकरणों का मौके पर निराकरण करने के बजाय कार्रवाई आवेदन लेने और आश्वासन देने तक सीमित रहती है, तो शिविरों के उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

‘शिविरों में भी हो रही औपचारिकता’
आजाद अध्यापक शिक्षक संघ, मप्र के प्रदेश उपाध्यक्ष केके आर्य ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को शिक्षक और कर्मचारियों के लंबित प्रकरणों का समय पर निराकरण करना चाहिए। शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन वहां भी औपचारिकता की जा रही है। यही कारण है कि शिक्षक और कर्मचारी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन तक जाने को मजबूर हैं।

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