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इंदौर में 40×40 इंच की सनातनी राखी: सबसे पहले खजराना गणेश को अर्पित की; महाकाल समेत कई मंदिरों में भी पहुंची

इंदौर। रक्षाबंधन के अवसर पर इंदौर से सनातन संस्कृति और राष्ट्रभाव का संदेश देने वाली भव्य राखी भगवान को अर्पित की गई। मातुश्री पालरेचा परिवार की ओर से तैयार की गई 40×40 इंच की सनातनी राखी गुरुवार सुबह सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध श्री खजराना गणेश को अर्पित की गई। इसके बाद बाबा महाकाल, अलिजा सरकार, बड़ा गणपति, छोटा गणेश और चिंतामणि गणेश मंदिर में भी हाथ से बनी इंदौरी राखी अर्पित की गई।

विशेष पूजा के बाद खजराना गणेश को बांधी राखी
खजराना गणेश मंदिर में पुजारी अशोक भट्ट, पुनीत भट्ट और सतपाल महाराज के निर्देशन में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भगवान गणेश को सनातनी राखी अर्पित की गई। इस दौरान शांतु पुंडरीक पालरेचा, नानेश पालरेचा और शैलेन्द्र गुप्ता मौजूद रहे। राखी अर्पण के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहा।

मल्हारगंज में सुबह से दर्शन के लिए पहुंचते रहे लोग
राखी अर्पित करने से पहले मल्हारगंज स्थित पालरेचा परिवार के निवास पर इसके दर्शन के लिए सुबह से ही शहरवासियों की भीड़ पहुंची। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक मालिनी गौड़, प्रमुख बाजारों के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में शहरवासियों ने भव्य राखी के दर्शन किए। लोगों ने इसे राष्ट्रभाव और सनातन संस्कृति से जोड़कर देखा।

‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पर आधारित रही थीम
इस वर्ष राखी की थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और राष्ट्रभाव पर आधारित रही। इसमें राष्ट्रीय चेतना, सनातन संस्कृति और भारतीय गौरव से जुड़े प्रतीकों को उकेरा गया। धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी मां वाग्देवी की प्रतिमा की पुनर्स्थापना के संकल्प को भी राखी में स्थान दिया गया।

कमल के आकार में सजाया सनातन वैभव
भव्य राखी को कमल के स्वरूप में तैयार किया गया। इसमें बाबा महाकाल, भगवान जगन्नाथ, मां महाकाली और मां महालक्ष्मी के स्वरूपों को कलात्मक ढंग से सजाया गया। राखी के जरिए सनातन आस्था, सांस्कृतिक एकता, शक्ति और राष्ट्र की सुख-समृद्धि का संदेश देने का प्रयास किया गया।

24 साल से भगवान को राखी अर्पित कर रहा परिवार
मातुश्री पालरेचा परिवार पिछले 24 वर्षों से भगवान को विशेष राखी अर्पित करने की परंपरा निभा रहा है। शांतु पुंडरीक पालरेचा, धीरज पालरेचा, जयेश पालरेचा, मितेश पालरेचा सहित परिवारजन इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस वर्ष 40×40 इंच की राखी तैयार करने में करीब ढाई महीने का समय लगा। राखी को सजाने के लिए कोलकाता, जयपुर, मुंबई और सूरत से सलमा-सितारे, नग-नगीने, मोती और जरदोजी की विशेष सामग्री मंगाई गई थी।

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