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पुजारी परिवार की महिलाएं महाकाल को बांधेगी राखी: 6 साल में मिलता है अवसर; ससुराल से आकर निभाती हैं परंपरा

उज्जैन। देशभर में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। धर्मनगरी उज्जैन में रक्षाबंधन की शुरुआत श्री महाकालेश्वर मंदिर से होगी। परंपरा अनुसार सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी बांधी जाएगी।

भगवान महाकाल के लिए डेढ़ से दो फीट लंबी विशेष राखी तैयार की गई है। इसे पुजारी परिवार की महिलाओं ने अपने हाथों से बनाया है।

मोरपंख, त्रिपुंड और ‘ॐ’ से सजी है विशेष राखी
बाबा महाकाल के लिए तैयार की गई राखी में मोरपंख, मिरर वर्क, भगवान शिव का त्रिपुंड, दिव्य नेत्र और पवित्र ‘ॐ’ के प्रतीक शामिल किए गए हैं। आकर्षक सजावट से सुसज्जित यह राखी भगवान महाकाल के प्रति श्रद्धा और आस्था का विशेष प्रतीक है।

छह साल में मिलता है राखी बांधने का अवसर 
महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार यहां 16 पुजारी परिवार भगवान महाकाल की सेवा करते हैं। अलग-अलग अवसरों पर सेवा का क्रम इन परिवारों को मिलता है। रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल को राखी अर्पित करने का अवसर भी क्रम के अनुसार मिलता है। एक परिवार को छह साल में एक बार यह अवसर प्राप्त होता है।

बेटियां भी ससुराल से उज्जैन पहुंचकर निभाती हैं परंपरा
जिस परिवार की सेवा का क्रम आता है, उस परिवार की महिलाएं बाबा महाकाल के लिए राखी तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। इस परंपरा की खास बात यह है कि परिवार की बेटियां भी अपने ससुराल से विशेष रूप से उज्जैन पहुंचती हैं और राखी बनाने के आयोजन में शामिल होती हैं।

हर पर्व की शुरुआत महाकाल के दरबार से 
सभी महिलाएं मिलकर भक्ति भाव से बाबा महाकाल के लिए राखी तैयार करती हैं। मान्यता है कि उज्जैन में हर पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से होती है। इसी परंपरा के तहत रक्षाबंधन पर सबसे पहले भगवान महाकाल को राखी बांधी जाती है और इसके बाद भाई-बहन के प्रेम व रक्षा का यह पर्व मनाया जाता है।

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