सोमनाथ हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प, हर आघात के बाद फिर उठ खड़ा हुआ भारत : मोदी

Narendra Modi ने पुनर्निर्मित Somnath Temple के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और आस्था का अटूट संकल्प है। उन्होंने कहा कि 11 मई को उन्हें एक बार फिर सोमनाथ धाम जाने का सौभाग्य मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने लेख में कहा कि सोमनाथ हमें यह सिखाता है कि कितने भी तूफान क्यों न आएं, भारत की आत्मा हर बार फिर से उठ खड़ी होती है। उन्होंने कहा कि प्रभास की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान मानी जाती है और यहां आने वाला हर श्रद्धालु भारत की उस सभ्यता की निरंतरता को महसूस करता है, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी।
प्रधानमंत्री मोदी ने उन वीरों और संतों को नमन किया जिन्होंने आक्रमणों और कठिन परिस्थितियों के बीच भी सोमनाथ की परंपरा और आस्था को जीवित रखा। उन्होंने महाराज धारसेन चतुर्थ, राजा भोज, कर्णदेव सोलंकी, कुमारपाल सोलंकी, पुण्यश्लोक Ahilyabai Holkar सहित कई ऐतिहासिक विभूतियों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने लौह पुरुष Sardar Vallabhbhai Patel के योगदान को याद करते हुए कहा कि 13 नवंबर 1947 को उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। बाद में K. M. Munshi ने इस संकल्प को आगे बढ़ाया और 1951 में मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा हुआ। उद्घाटन समारोह में भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक क्षण को और विशेष बना दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में देश “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। Kashi Vishwanath Temple, Kedarnath Temple, Ram Mandir Ayodhya और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का आधुनिक सुविधाओं के साथ विकास किया गया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ भारत की अपराजित आत्मा का प्रतीक है और इसकी प्रेरणा सदियों तक राष्ट्र को ऊर्जा देती रहेगी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से इस ऐतिहासिक अवसर पर सोमनाथ धाम की यात्रा करने और इसकी भव्यता का अनुभव करने की अपील भी की।





