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बिहार में लीची फसल पर ‘स्टिंग बग’ का खतरा, केंद्र ने बनाई टास्क फोर्स

Bihar में लीची की फसल पर मंडरा रहे “लीची स्टिंग बग” के खतरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फसल को हो रहे नुकसान का मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है।

Shivraj Singh Chouhan ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञ टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है। यह कार्यबल लीची स्टिंग बग के प्रकोप और उससे होने वाले नुकसान का आकलन करेगा।

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक होंगे अध्यक्ष

National Research Centre on Litchi, मुजफ्फरपुर के निदेशक को इस टास्क फोर्स का अध्यक्ष बनाया गया है।

कार्यबल में बिहार सरकार के उद्यान एवं कृषि विभाग के प्रतिनिधियों के अलावा Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University और Bihar Agricultural University के कीट वैज्ञानिकों को भी शामिल किया गया है।

किसानों ने उठाई थी समस्या

यह मुद्दा 7 मई को लखनऊ में आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम के दौरान सामने आया। कार्यक्रम ICAR-Central Institute for Subtropical Horticulture में आयोजित किया गया था।

बिहार के लीची उत्पादक जिलों से पहुंचे किसानों ने बताया कि स्टिंग बग के प्रकोप से फलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और उत्पादन में भारी गिरावट देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नियंत्रण उपाय नहीं किए गए, तो बिहार के लीची उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।

किसानों ने मांग की है कि वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर जल्द नियंत्रण रणनीति तैयार की जाए, ताकि लीची की फसल और किसानों की आय को बचाया जा सके।

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