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धर्म और सदाचार का पालन करें, अहंकार से दूर रहें – अग्रपीठाधीश्वर श्री राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज

इंदौर, 30 अक्टूबर 2025
नंदानगर स्थित गणेश मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन अग्रपीठाधीश्वर – मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने भक्तों को जीवन में धर्म, सदाचार और सच्चाई के पालन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हमेशा ईमानदारी, करुणा, क्षमा और दया का व्यवहार करना चाहिए तथा अहंकार और निंदा से दूर रहना चाहिए।

महाराज श्री ने कहा कि “जो भगवान के शरणागत होकर रहते हैं, उन्हें कभी आंच नहीं आती। व्यक्ति को किसी के प्रति दुर्भावना नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि उसके कर्म ही उसे श्रेष्ठ बनाते हैं। जिस दिन परमात्मा जीवन में प्रवेश करते हैं, उसी दिन से आनंद का आरंभ होता है — सुख सदैव पुण्य का फल होता है।”

कथा के दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र सहित अनेक प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों, साधु-संतों और ब्राह्मणों ने कथा का श्रवण किया।

सात दिनों तक चली इस श्रीमद् भागवत कथा का समापन वेद मंत्रों के बीच हुआ। समापन अवसर पर 108 दीपों से महाआरती का आयोजन किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।

कार्यक्रम में पचकुइया पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर रामगोपालदास महाराज, महामंडलेश्वर गंगादास महाराज, जानकीवल्लभ दास महाराज सहित अनेक संत उपस्थित रहे।

व्यासपीठ का पूजन-अर्चन विधायक श्री रमेश मेंदोला, रत्नेश मेंदोला और चंदू शिंदे द्वारा किया गया। कथा के समापन पर सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे और दिव्य माहौल में भागवत कथा का आनंद लिया।

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