नेपाल में संपत्ति जांच आयोग का दायरा तय, राष्ट्रपति और मौजूदा जज बाहर

नेपाल सरकार ने सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए गठित संपत्ति जांच आयोग का दायरा तय कर दिया है। आयोग का कार्यादेश (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही इसके औपचारिक कामकाज की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया है।
कार्यादेश के अनुसार, आयोग प्रधानमंत्री से लेकर उपसचिव स्तर तक के वर्तमान और पूर्व सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्तियों की जांच करेगा। हालांकि इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मौजूदा न्यायाधीशों को सीधे जांच के दायरे से बाहर रखा गया है। वहीं उनके सचिवालय से जुड़े अधिकारी जांच के दायरे में शामिल होंगे।
सरकार ने इस आयोग का गठन राजेन्द्रकुमार भण्डारी की अध्यक्षता में किया है। आयोग में पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, पूर्व न्यायाधीश चण्डीराज ढकाल, पूर्व डीआईजी गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लम्साल सदस्य हैं।
आयोग को देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों का विवरण जुटाने और उनकी वैधता, स्रोत तथा वृद्धि का विश्लेषण करने का अधिकार दिया गया है। जांच के दायरे में पूर्व प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद, संवैधानिक निकायों के प्रमुख, न्यायाधीश, सेना अधिकारी और अन्य उच्च पदाधिकारी शामिल होंगे।
इसके अलावा राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, महान्यायाधिवक्ता, स्थानीय निकायों के प्रमुख और विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों के अधिकारी भी जांच के दायरे में आएंगे। सिविल सेवा, पुलिस, सशस्त्र पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो और विदेश स्थित दूतावासों के अधिकारी भी जांच के अधीन होंगे।
हालांकि मौजूदा न्यायाधीशों और सेना के अधिकारियों के मामलों को संबंधित निकायों—जैसे न्याय परिषद या रक्षा मंत्रालय—को भेजा जाएगा।
आयोग चरणबद्ध तरीके से जांच करेगा। पहले चरण में वर्ष 2008 से वर्तमान तक के पदाधिकारियों की संपत्ति की जांच होगी, इसके बाद 1988 से 2008 तक के मामलों की जांच की जाएगी।
जांच प्रक्रिया में अवैध संपत्ति, भ्रष्टाचार, बिचौलियापन और शिकायतों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी के पास असामान्य संपत्ति पाई जाती है, तो संबंधित निकाय को कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
आयोग शिकायतों को लिखित, मौखिक, डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से स्वीकार करेगा और शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। इसके अलावा विदेशी संपत्तियों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और कूटनीतिक मिशनों से सहयोग लिया जाएगा।
सरकार ने आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करने का निर्देश दिया है। आयोग का कार्यकाल एक वर्ष का होगा और इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी बन सके।






