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नरोत्तम मिश्रा ने डबरा से लड़ा था पहला चुनाव, 3 चुनाव हार चुके हैं नरोत्तम; पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर से लेकर शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री भी रहे 

मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव से पहले प्रदेश का राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए पूर्व गृह मंत्री और पार्टी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया है। बीजेपी ने उनकी जगह युवा चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। पार्टी के इस फैसले के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में इस फैसले को लेकर गहरा असंतोष देखा जा रहा है और कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन की खबरें भी सामने आ रही हैं। नरोत्तम मिश्रा लंबे समय से दतिया और ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति का मुख्य केंद्र रहे हैं। उन्होंने प्रदेश की राजनीति में एक कद्दावर और संकटमोचक नेता के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। यही वजह है कि अचानक उनका टिकट कटने से उनके समर्थक स्तब्ध हैं और उनके राजनीतिक सफर तथा चुनावी रिकॉर्ड को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बता दें कि नरोत्तम मिश्रा दो बार विधानसभा और एक बार लोकसभा का चुनाव अपने राजनीतिक करियर में हार चुके है।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में जन्मे नरोत्तम मिश्रा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता के रूप में की थी। उन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। अपनी पढ़ाई के दौरान ही वह छात्र राजनीति में काफी सक्रिय रहे और ग्वालियर स्टूडेंट यूनियन में अहम जिम्मेदारियां संभालीं। संगठन में उनकी सक्रियता और पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें जल्द ही चुनावी राजनीति में उतारने का फैसला किया था।

डबरा सीट से रखा था चुनावी राजनीति में कदम

नरोत्तम मिश्रा का चुनावी सफर साल 1990 में शुरू हुआ, जब बीजेपी ने उन्हें पहली बार डबरा विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की और पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1998 और 2003 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने डबरा सीट पर अपनी जीत का परचम लहराया। हालांकि, साल 1993 के चुनाव में उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा था। इसके बाद जब नए परिसीमन में डबरा सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित हो गई, तो उन्हें अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर नए राजनीतिक मैदान की तलाश करनी पड़ी।

दतिया को बनाया अपना नया राजनीतिक गढ़

डबरा सीट आरक्षित होने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने दतिया का रुख किया। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में वह पहली बार दतिया सीट से चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में भी दतिया से लगातार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। दतिया से लगातार तीन बार विधायक चुनकर उन्होंने इस क्षेत्र को बीजेपी के अभेद्य किले में तब्दील कर दिया था।

2023 के चुनाव में लगा था बड़ा झटका

लगातार जीत का रिकॉर्ड बनाने वाले नरोत्तम मिश्रा को साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। बेहद कड़े और रोचक मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने उन्हें लगभग 7 हजार वोटों के अंतर से हरा दिया। कई सालों बाद मिली इस चुनावी हार ने उनके राजनीतिक ग्राफ को प्रभावित किया, जिसे इस बार उनका टिकट कटने की बड़ी वजहों में से एक माना जा रहा है। इसके पहले नरोत्तम ने विधानसभा सदस्य रहते हुए 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया से हार गये थे।

सरकार में निभाई कई अहम जिम्मेदारियां

नरोत्तम मिश्रा सिर्फ एक विधायक के रूप में ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में गिने जाते रहे हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर से लेकर शिवराज सिंह चौहान की सरकारों में लगातार बेहद महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान गृह, कानून एवं विधायी कार्य, जेल और संसदीय कार्य जैसे बड़े और भारी-भरकम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। अपनी बेबाक बयानबाजी, सख्त प्रशासनिक फैसलों और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने की शैली के कारण वे हमेशा प्रदेश की राजनीति की सुर्खियों में बने रहे।

चुनाव आयोग ने कर दिया गया था अयोग्य घोषित

बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा को 2008 के विधानसभा चुनावों में चुनाव खर्च के गलत खाते दाखिल करने और अपने चुनाव अभियान में पेड न्यूज का उपयोग करने और चुनाव खर्च के सही खाते पेश नहीं करने के लिए उन्हें 23 जून 2017 को चुनाव आयोग द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया था। जिसके बाद मिश्रा राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट चले गए। इस मामले में मई 2018 के अपने फैसले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के आदेश को रद्द कर दिया।

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