किशोर कुमार की बायोग्राफी पर विवाद: नेशनल अवॉर्ड रद्द करने की मांग; पटना हाईकोर्ट ने मंत्रालय-NFDC को नोटिस

पटना। किशोर कुमार की जिंदगी पर लिखी गई एक बायोग्राफी अब खुद विवादों में घिर गई है। उनकी किताब ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ को मिले नेशनल फिल्म अवॉर्ड को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। लेखक और साहित्य समीक्षक अनंत प्रसाद सिन्हा ने अवॉर्ड रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि ‘बेस्ट सिनेमा बुक’ कैटेगरी में अवॉर्ड देने के दौरान तय नियमों का पालन नहीं हुआ। मामले में कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, NFDC, जूरी सदस्यों और किताब के लेखकों को नोटिस जारी किया है।

‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ में किशोर कुमार की जिंदगी, संगीत और उनके अलग अंदाज को बताया गया है। किशोर कुमार सिर्फ गायक नहीं थे। उन्होंने अभिनेता, संगीतकार, लेखक, निर्देशक और निर्माता के तौर पर भी काम किया।

कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस अजीत कुमार की अदालत में हुई। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। केंद्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। अब मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।

विवाद किस बात पर है?
याचिकाकर्ता का मुख्य सवाल है कि किशोर कुमार की बायोग्राफी को ‘भारतीय सिनेमा पर किताब’ की श्रेणी में कैसे रखा गया। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के नियमों के अनुसार बेस्ट सिनेमा बुक ऐसी किताब होनी चाहिए, जो भारतीय सिनेमा पर केंद्रित हो। उनकी किताब ‘दो गुलफामों की तीसरी कसम’ 1966 की फिल्म तीसरी कसम के बनने की छह साल की यात्रा पर आधारित है।

खंडवा में जन्मे थे किशोर कुमार
किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को खंडवा, मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत अभिनेता के तौर पर ‘शिकारी’ (1946) से की। बाद में गायकी में उनकी पहचान तेजी से बनी। 1948 की फिल्म ‘जिद्दी’ में उन्होंने पहली बार गाना गाया। यह गाना देव आनंद पर फिल्माया गया था।

एसडी बर्मन ने बदली गायकी की दिशा
किशोर कुमार शुरुआत में केएल सहगल से काफी प्रभावित थे और उनकी शैली में गाने की कोशिश करते थे। संगीतकार एसडी बर्मन ने उन्हें अपनी अलग आवाज और अंदाज बनाने की सलाह दी। इसके बाद किशोर कुमार ने अपनी गायकी में अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज और योडलिंग का अंदाज लोगों को खूब पसंद आया। आगे चलकर वह हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गायकों में शामिल हुए।

फीस को लेकर भी मशहूर थे किशोर दा
किशोर कुमार अपने काम की फीस को लेकर काफी सख्त माने जाते थे। वह पूरी फीस मिलने के बाद ही काम शुरू करने की बात पर कायम रहते थे। उनसे जुड़े कई किस्से आज भी मशहूर हैं। एक बार कम फीस मिलने पर उन्होंने शूटिंग के दौरान सेट से भागने की कोशिश की। एक दूसरे मामले में आधी फीस मिलने पर वह आधा सिर और आधी मूंछ मुंडवाकर सेट पर पहुंच गए थे।

एक निर्माता से पैसे बाकी होने पर वह उसके घर के बाहर जाकर बार-बार अपने पैसे मांगते थे। हालांकि, जरूरतमंदों की मदद के लिए उन्होंने कई बार बिना फीस के भी काम किया।

अमिताभ बच्चन से नाराजगी के बाद नहीं दी आवाज
किशोर कुमार और अमिताभ बच्चन के बीच भी एक किस्सा काफी चर्चित रहा है। बताया जाता है कि एक फिल्म में अमिताभ के गेस्ट अपीयरेंस से जुड़े मामले में किशोर कुमार नाराज हो गए थे। इसके बाद उन्होंने अमिताभ पर फिल्माए गए कुछ गानों को अपनी आवाज देने से इनकार कर दिया था।

मोहम्मद रफी से दोस्ती भी खास थी
किशोर कुमार और मोहम्मद रफी को अक्सर एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी माना जाता था। लेकिन दोनों के बीच अच्छी दोस्ती भी थी। रफी के निधन के बाद किशोर कुमार उनके शव के पास जाकर काफी भावुक हो गए थे। उनके बेटे अमित कुमार ने एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र किया था।

इमरजेंसी के दौरान गानों पर लगा था बैन
1975 में इमरजेंसी के दौरान किशोर कुमार से एक सरकारी कार्यक्रम में गाने के लिए कहा गया था। उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनके गानों को ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर बजाने पर रोक लगा दी गई थी। बाद में यह प्रतिबंध हटा दिया गया।

1987 में हुआ निधन
किशोर कुमार ने 1987 में फिल्म इंडस्ट्री से दूर होने और खंडवा में रहने की इच्छा जताई थी। लेकिन 13 अक्टूबर 1987 को 58 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उनका अंतिम संस्कार उनके जन्मस्थान खंडवा में किया गया।

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