रूसी खतरे के बीच यूरोप की 10 साल की तैयारी: NATO बढ़ाएगा हथियार और सैनिकों की ट्रेनिंग; अस्पताल-बंकर भी तैयार होंगे

वॉशिंगटन। यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच यूरोप के NATO देश अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर रहे हैं। NATO ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर GDP का 5% खर्च करने का लक्ष्य तय किया है। इसका एक बड़ा हिस्सा सेना, हथियार और सैन्य क्षमता बढ़ाने पर खर्च होगा। बाकी रकम साइबर सुरक्षा, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर लगाई जाएगी।

यानी NATO की तैयारी सिर्फ नए हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में सैनिकों की ट्रेनिंग, सैन्य ठिकानों, अस्पतालों, बंकरों, सड़कों और साइबर सिस्टम को भी मजबूत किया जाएगा।

2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर खर्च
NATO देशों ने 2035 तक हर साल GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा से जुड़े खर्च पर लगाने का लक्ष्य रखा है। इसमें कम से कम 3.5% GDP सीधे सैन्य क्षमता बढ़ाने पर खर्च होगा। इसमें सेना, हथियार और NATO की तय सैन्य जरूरतें शामिल हैं। बाकी 1.5% GDP रक्षा और सुरक्षा से जुड़े दूसरे कामों पर खर्च किया जाएगा। इसमें जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नागरिक सुरक्षा और रक्षा उद्योग को मजबूत करना शामिल है।

कोपेनहेगन में NATO के 32 देशों के रक्षा प्रमुखों की बैठक
18 और 19 सितंबर को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में NATO की मिलिट्री कमेटी की बैठक हुई। इसमें NATO के 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुख शामिल हुए। बैठक में NATO की सामूहिक सुरक्षा, यूक्रेन के लिए समर्थन, नई तकनीक और सैन्य क्षमता मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

जर्मनी पुराने मेडिकल बंकर फिर तैयार कर रहा
यूरोप की तैयारी सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है। जर्मनी में पुराने मेडिकल बंकरों को फिर से इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल घायलों के इलाज के लिए किया जा सकता है।

नॉर्वे भी अस्पतालों को युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार कर रहा है। वहां बड़ी संख्या में अस्पताल बेड ऐसी स्थिति में इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।

इसका मतलब है कि NATO देश युद्ध या बड़े संकट की स्थिति में आम नागरिकों के इलाज और जरूरी सेवाओं को जारी रखने की क्षमता भी बढ़ा रहे हैं।

NATO के अलग-अलग देश अपनी जरूरत के हिसाब से तैयारी कर रहे हैं।
पोलैंड: 2027 से हर साल करीब 1 लाख लोगों को सैन्य ट्रेनिंग देने की योजना है। कुल 5 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य बताया गया है।
ब्रिटेन: गोला-बारूद और विस्फोटक बनाने के लिए नई फैक्ट्रियां बनाने की तैयारी है। देश में बने लंबी दूरी के हथियारों की खरीद भी बढ़ाई जा रही है।
लिथुआनिया: युवाओं को सैन्य सेवा के लिए बुलाने की तैयारी की जा रही है।
स्वीडन: नागरिकों को किसी बड़े संकट की स्थिति के लिए घर में कम से कम 7 दिन की जरूरी चीजें रखने की सलाह दी गई है।

ट्रम्प भी यूरोप से ज्यादा रक्षा खर्च की मांग कर चुके हैं
यूरोपीय देशों के रक्षा खर्च बढ़ाने के पीछे सिर्फ यूक्रेन युद्ध ही वजह नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से NATO के यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने की मांग करते रहे हैं।

NATO ने 2025 में हेग सम्मेलन में 2035 तक 5% GDP रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य तय किया था। 2026 के अंकारा सम्मेलन में भी इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

यूरोप में हथियारों की खरीद तेजी से बढ़ी
रूस से जुड़े सुरक्षा खतरे और यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोपीय देशों ने हथियारों की खरीद बढ़ाई है। SIPRI के मुताबिक, 2021-25 में यूरोप के 29 NATO देशों का बड़े हथियारों का आयात 2016-20 की तुलना में 143% बढ़ गया। इस दौरान इन देशों के हथियार आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 58% रही। SIPRI के अनुसार, पूरे यूरोप में 2021-25 के दौरान हथियारों का आयात 2016-20 की तुलना में 210% बढ़ा।

NATO के मुताबिक, इन तैयारियों का उद्देश्य उसकी सामूहिक रक्षा और सैन्य क्षमता को लंबे समय तक मजबूत करना है।

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