ईरान वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड नहीं गए जेडी वेंस, अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी तकनीकी बातचीत पर संशय
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद अगले चरण की वार्ता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड के लिए रवाना नहीं हुए हैं। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ तकनीकी स्तर की बातचीत की रूपरेखा अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है।
व्हाइट हाउस ने किया स्पष्ट
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता के अनुसार उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही थीं, वे फिलहाल सही नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित तकनीकी वार्ताओं की तैयारी जारी है, लेकिन उनकी तारीख और प्रारूप अभी तय नहीं हुआ है।
समझौते के बाद कम हुआ तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों का आवागमन सामान्य रूप से जारी है।
ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों के खुले रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
कांग्रेस नेताओं को दी गई जानकारी
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी समझौते की जानकारी दी है। बताया गया है कि प्रशासन के अधिकारियों ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की विदेश मामलों से जुड़ी समितियों के नेताओं के साथ फोन पर चर्चा की।
इस दौरान सांसदों के सवालों के जवाब दिए गए और ईरान के साथ संभावित आगामी वार्ताओं की रूपरेखा साझा की गई।
लेबनान मुद्दे पर बना हुआ है मतभेद
इस बीच क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। इजराइल और लेबनान सीमा से जुड़े सुरक्षा मामलों को लेकर अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद क्षेत्रीय संघर्षों के सभी मुद्दे अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं और आने वाले समय में कूटनीतिक बातचीत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ सकती है बातचीत
राजनयिक सूत्रों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आगे तकनीकी स्तर की वार्ता हो सकती है। हालांकि फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से किसी आधिकारिक बैठक की तारीख घोषित नहीं की गई है।
मध्य पूर्व की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी वार्ताएं सफल रहती हैं, तो यह क्षेत्र में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
