नाटी फूड्स के मालिक संजय अग्रवाल पर 2 करोड़ की पेनल्टी का केस, लग्जरी प्रोजेक्ट में अवैध खनन का आरोप

अवैध खन्ना के केस में फसे इंदौर के कन्फेक्शनरी कंपनी नाटी फूड्स के मालिक संजय अग्रवाल। साथ ही संजय की पत्नी रानी अग्रवाल और भाई विनोद अग्रवाल केस दर्ज किया गया है। मामल अपर कलेक्टर तक पहुंच गया है मामला।

इंदौर की बड़ी कन्फेक्शनरी कंपनी नाटी फूड्स के कारोबारी संजय अग्रवाल अब रियल एस्टेट सेक्टर में भी कदम रख चुके हैं। उनकी रियल एस्टेट कंपनी प्रकृति रियलटर्स प्रा.लि. का स्कीम-140 में बन रहा लग्जरी प्रोजेक्ट सेरेनिटी अब विवादों में फस गया है। इस प्रोजेक्ट पर अवेध खनन का मामला दर्ज हुआ है और केस अपर कलेक्टर कोर्ट, कलेक्टोरेट में पहुंच गया है।

खनिज अधिकारीयों की जांच में यह पाया गया

जांच में सामने आया कि ग्राम पिपलियाहना , स्किम -140 के सर्वे नम्बर को लेकर अधिवक्ता ज्ञानेंद्र पटेल ने 12 जून 2025 को अवैध खनन की शिकायत की थी। सहायक खनिज अधिकारी अलोक अग्रवाल ने 24 नवंबर को मौके पर जाकर जांच की थी, और सभी लोगो के बयान लिए और साथ ही जरुरी दस्तावेज की पड़ताल के आधार पर यह केस तैयार किया है।

जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई। यहां अवैध रूप से मुरम और मिट्टी निकली गई थी, जो मौके पर नहीं पाई गई। जांच में यही भी देखने देखने को मिला कि बिना रॉयल्टी और अनुमति के बाहर ले जाया गया था।

जब इस बारे में प्रकृति रियलटर्स के डायरेक्टर से पूछा गया तो उन्होंने यह आरोप कंस्ट्रक्शन कंपनी पर थोप दिया। कंस्ट्रक्शन कंपनी का कहना है कि, जिम्मेदारी प्रकृति रियलटर्स की है। इस तरह दोनों पक्षों में वैद्य अनुमति नहीं पाई गई।

2 करोड़ की पेनल्टी इस तरह लगी

बेसमेंट बनाने के लिए जितनी पर्यावरण और रॉयल्टी की मंजूरी दी गई थी, उससे कही ज्यादा बड़ा गंड्ढा खोदा गया था। इसी दौरान लगभग 13 हजार 532 घनमीटर मिट्टी और मुरम का अवैध रूप से खनन किया गया था। इस खनन पर प्रति घनमीटर के हिसाब से करीब 6 लाख 73 हजार रुपए का शल्क बनता है। नियमों के अनुसार रॉयल्टी का 15 गुना जुर्माना लगाया गया, जो लगभग। 1 करोड़ 1 लाख रुपए बैठता है।

इसके अलावा पर्यावरण को हए नुकसान के चलते उतनी ही राशि यानी 1 करोड़ 1 लाख रुपए का अतिरिक्त दंड भी तय किया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 2 करोड 3 लाख रुपए के अवैध खनन का मामला दर्ज किया गया है।

शिकायत के बाद सालभर लग गया जांच से केस तक

वहीं इस मामले में खनिज विभाग की कार्यशैली भी कठघरे में है। इसमें शिकायत 12 जून 2025 को हई थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने मौके पर जांच करने की जगह नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शूरू की।

कंपनी को 30 जून को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, जो 19 सितंबर 2025 में आया। इसके बाद कंस्ट्रक्शन
कंपनी को 9 अक्टबर को नोटिस दिया गया था। वहीं मौके पर खनिज अधिकारी द्वारा जांच 24 नवंबर को की गई थी। पूरी रिपोर्ट 30 जनवरी को बनाई गई। अब यह केस अपर कलेक्टर कोर्ट में पेश हुआ है।

शिकायतकर्ता अधिवक्ता पटेल का यह भी आरोप है कि यह अवैध खनन (अवैध खनन केस) 13 हजार घनमीटर से कहीं अधिक हुआ है। पेनल्टी पांच करोड़ रुपए से अधिक की बनती है। इसमें बिल्डर कंपनी को लाभ पहुंचाते हुए बहुत काम रॉयल्टी चोरी (केवल 6.73 लाख रुपए) बताई गई। वहीं जांच में और केस बनाने में भी देरी की गई है

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