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इंदौर स्मार्ट सिटी में 1000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप: MIC सदस्य राजेंद्र राठौर बोले- मेयर भी चाहते हैं जांच; कहा- इससे अच्छा काम पप्पू ठेकेदार कर लेता

इंदौर। इंदौर स्मार्ट सिटी के कामों को लेकर नगर निगम के मेयर इन काउंसिल (MIC) सदस्य और वार्ड-32 के भाजपा पार्षद राजेंद्र राठौर ने 1000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की जांच की मांग भी की है। उन्होंने दावा किया कि इंदौर के मेयर भी इस मामले की जांच चाहते हैं।

गुजरात की कंपनी को ठेका देने पर उठाए सवाल

राजेंद्र राठौर ने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी से जुड़ा ठेका गुजरात की एक कंपनी को दिया गया था। उनके मुताबिक, कंपनी ने काम की गुणवत्ता के मामले में लापरवाही बरती और घटिया काम किया। राठौर ने काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे बेहतर काम तो इंदौर का स्थानीय पप्पू ठेकेदार’ भी कर सकता था।

जांच की मांग
राठौर ने स्मार्ट सिटी के कामों और उनसे जुड़े खर्च की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि 1000 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।
हमें बहुत बड़े-बड़े सपने दिखाए थे
राजेंद्र राठौर ने कहा कि जब मनीष सिंह कमिश्नर थे तो हमें बहुत बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। हमें लगा था कि खजूरी बाजार लंदन जैसा हो जाएगा पर उनकी एक भी बात पूरी नहीं हुई। सड़क टूटने की जो घटना हुई है इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। महापौर और हम सब यही चाहते है।
लोगों को स्मार्ट सिटी के नाम पर चूना लगाया
उन्होंने आगे कहा कि शहर में इस प्रकार की और भी रोड होगी। हमने अपने क्षेत्र में भी एक साल पहले बनी रोड पर डामर लगाया  है। लोगों को स्मार्ट सिटी के नाम पर चूना लगाया जा रहा है। अगर यह स्मार्ट सिटी का काम है तो इससे अच्छा काम हमारे क्षेत्र का पप्पू ठेकेदार कर सकता है इसके लिए गुजरात से मजदूर बुलाने की जरूरत नहीं है। इस मामले को लेकर निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने ठेकेदार को नोटिस भी दिया था पर ठेकेदार ने उन्हे ही नोटिस भेज दिया और फिर इस विषय पर कोई बात नहीं हुई।

मुख्यमंत्री को लिखा था जांच के लिए पत्र
इसके बाद नेहरू पार्क का काम मैंने अपने हाथ में लिया। 9 करोड़ खर्च करने के बाद उसकी जो दुर्दशा हुई है वह देखने लायक है। हमने 10-20 लाख में उसको अच्छा बना दिया। गांधी हाल को भी सुधार नहीं पाए। कई और सड़कें भी जो स्मार्ट सिटी में आती है उनकी हालत खराब है। इसकी जांच की मांग भी मैंने की है। मैं प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कैलाश विजीयवर्गी को इसकी जांच के लिए दो-दो बार पत्र भेज चुका हूं। इसके बाद वहां से ACS के द्वारा जांच करने की बात की गई पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।             
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