न केंद्रीय रजिस्ट्रेशन, न पारंपरिक सदस्यता; आखिर कैसे काम करता है RSS? जानिए पूरी व्यवस्था
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र और प्रिया खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद संगठन एक बार फिर चर्चा में है। इस बहस के बीच लोगों के मन में कई प्रश्न उठ रहे हैं कि RSS किस प्रकार काम करता है, उसका कानूनी स्वरूप क्या है और उसकी फंडिंग तथा संचालन की व्यवस्था कैसे चलती है।
क्या RSS एक पंजीकृत संगठन है?
RSS का कहना है कि उसका कभी औपचारिक केंद्रीय पंजीकरण नहीं कराया गया। संघ के अनुसार वह स्वयं को एक वैचारिक और सांस्कृतिक संगठन मानता है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि विभिन्न न्यायिक निर्णयों में RSS को “Body of Individuals” (व्यक्तियों के समूह) के रूप में देखा गया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के अनुसार RSS की स्थापना 1925 में हुई थी, जब भारत पर ब्रिटिश शासन था। उनका तर्क है कि उस समय संगठन का पंजीकरण नहीं कराया गया और स्वतंत्रता के बाद भी कानून के तहत ऐसा करना अनिवार्य नहीं था। संघ यह भी कहता है कि उस पर विभिन्न समयों में लगे प्रतिबंध और बाद में उनके हटने से उसकी कानूनी पहचान को मान्यता मिली।
संघ की गतिविधियां कैसे संचालित होती हैं?
RSS के अनुसार उसकी शाखाओं का संचालन स्थानीय स्वयंसेवकों द्वारा किया जाता है। संघ विभिन्न क्षेत्रों में अपने आनुषंगिक और प्रेरित संगठनों के माध्यम से गतिविधियां संचालित करता है। इन संगठनों का अपना अलग प्रशासनिक ढांचा होता है और वे संबंधित सरकारी नियमों के अनुसार कार्य करते हैं।
‘गुरु दक्षिणा’ क्या है और फंडिंग कैसे होती है?
संघ की परंपरा के अनुसार हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्वयंसेवक ‘गुरु दक्षिणा’ अर्पित करते हैं। यह योगदान स्वैच्छिक होता है और राशि एक रुपये से लेकर इच्छानुसार अधिक भी हो सकती है।संघ का कहना है कि इसी प्रकार प्राप्त धनराशि से उसके विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां संचालित होती हैं तथा इसका लेखा-जोखा रखा जाता है। अतीत में आयकर संबंधी विवादों के दौरान अदालतों में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी।
क्या RSS का कोई लिखित संविधान है?
आम धारणा के विपरीत RSS का एक लिखित संविधान है। संघ पर महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगे पहले प्रतिबंध के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था। प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया में संघ ने लिखित संविधान अपनाया। संविधान के अनुसार संगठन की कार्यप्रणाली निर्धारित है। संघ का कहना है कि सरसंघचालक को छोड़कर अन्य कई पदों के लिए चुनाव की व्यवस्था है। संगठन राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय स्तर पर नियमित बैठकों के माध्यम से अपना कार्य संचालित करता है।
स्वयंसेवकों और शाखाओं का रिकॉर्ड
संघ के अनुसार उसकी शाखाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और स्वयंसेवकों का रिकॉर्ड रखा जाता है। संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं।
RSS में निर्णय कैसे लिए जाते हैं?
संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा मानी जाती है, जिसकी बैठक सामान्यतः हर वर्ष मार्च में आयोजित होती है। इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक वर्ष में दो बार आयोजित की जाती है। इसके अलावा क्षेत्र, प्रांत और अन्य संगठनात्मक स्तरों पर भी नियमित बैठकें होती हैं, जिनमें संगठन की दिशा, कार्यक्रमों और गतिविधियों पर चर्चा की जाती है।
प्रशिक्षण की व्यवस्था
RSS हर वर्ष ग्रीष्मकाल के दौरान संघ शिक्षा वर्ग (OTC) आयोजित करता है। इन प्रशिक्षण शिविरों में स्वयंसेवकों को वैचारिक, संगठनात्मक और शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे संगठन की गतिविधियों में अधिक प्रभावी ढंग से भाग ले सकें।
