धार में रेल लाइन पर काम करने वाले मजदूरों का धरना: 2 महीने की मजदूरी बाकी; हादसे में घायल 18 को मुआवजा नहीं

धार। टांडा-छोटाउदयपुर रेल लाइन के हाईस्पीड ट्रायल के बीच टांडा के घोर रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में मजदूर बकाया मजदूरी और हादसे में घायल मजदूरों को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं।
मजदूरों ने ठेकेदार पर उनकी मजदूरी की राशि लेकर गायब होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब तक मजदूरी का भुगतान, मृतक के परिवार को सहायता और घायलों को मुआवजा नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
दो महीने काम के बाद भी मजदूरी नहीं मिली
धरने पर बैठे मजदूरों के अनुसार वे करीब दो महीने से रेल लाइन निर्माण कार्य में लगे हुए हैं। शुरुआत में उन्होंने टांडा के घोर रेलवे स्टेशन पर काम किया। इसके बाद उन्हें अलीराजपुर जिले के डेकाकुंड रेलवे स्टेशन पर काम करने के लिए भेजा गया।
मजदूरों का आरोप है कि काम के दौरान उन्हें सिर्फ रोजमर्रा के खर्च के लिए कुछ राशि दी गई, लेकिन पूरी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।
हादसे में 1 की मौत, 18 मजदूर घायल
4 अगस्त की शाम डेकाकुंड रेलवे स्टेशन से मजदूर ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर टांडा के नरवाली की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे रेत से भरे डंपर ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को टक्कर मार दी। हादसे में ग्राम कोडदा निवासी आनंद पिता करमसिंह की मौत हो गई, जबकि 18 मजदूर घायल हुए।
मजदूरों के अनुसार घायलों में एक युवती भी शामिल है, जिसके दोनों पैर टूटने की जानकारी सामने आई है। हादसे की रिपोर्ट अलीराजपुर जिले के बोरी थाने में दर्ज कराई गई थी।

सहायता नहीं मिलने का आरोप
मजदूरों का कहना है कि हादसे के बाद घायलों को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिली। मृतक मजदूर के परिवार की भी रेलवे विभाग या संबंधित जिम्मेदारों की ओर से कोई उचित मदद नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
मजदूरों ने हादसे की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई, मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और घायलों के इलाज व मुआवजे की मांग की है।
सुपरवाइजर बोले- ठेकेदार को दी जा चुकी मजदूरी
धरने पर बैठे मजदूरों के साथी दिलीप अलावा ने बताया कि करीब दो महीने काम करने के बाद भी मजदूरों को उनकी मेहनत की पूरी राशि नहीं मिली। वहीं, रेलवे विभाग के सुपरवाइजर जितेंद्र के अनुसार मजदूरों की मजदूरी की राशि दाहोद निवासी ठेकेदार दिनेश डामोर को दी जा चुकी है।
इसके बाद मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार राशि लेकर गायब हो गया और अब उन्हें अपनी मेहनत की कमाई के लिए धरना देना पड़ रहा है।

कानूनी कार्रवाई और सहायता की मांग
मजदूरों ने मामले में कानूनी सहायता नहीं मिलने का आरोप भी लगाया है। उनकी मांग है कि हादसे की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और घायलों के इलाज के साथ उचित मुआवजा दिया जाए।
हाईस्पीड ट्रायल के बीच प्रदर्शन
टांडा-छोटाउदयपुर रेल परियोजना के तहत छोटाउदयपुर से जोबट तक करीब 85 किलोमीटर रेलखंड का काम पूरा होने के बाद इस मार्ग पर रेल संचालन शुरू हो चुका है। जोबट से डेकाकुंड तक करीब 13 किलोमीटर रेलखंड का निर्माण भी पूरा किया गया है।
डेकाकुंड से टांडा रोड तक करीब 16 किलोमीटर नए रेलखंड में स्टेशन, ट्रैक और विद्युतीकरण से जुड़े काम पूरे किए जा चुके हैं। अगस्त 2026 में इसी रेलखंड पर लोको इंजन का 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हाईस्पीड ट्रायल भी किया गया था।
रेल परियोजना की प्रगति के बीच मजदूरों के धरने से बकाया मजदूरी, हादसे में मृत मजदूर के परिवार को सहायता और घायलों के मुआवजे का मुद्दा सामने आया है। मजदूरों ने मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने की बात कही है।