धार कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी घोषित: उमंग सिंघार के समर्थकों को महत्व; बालमुकुंद समर्थकों की उपेक्षा

धार। कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। 52 पदाधिकारियों की टीम ने जिले के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
कार्यकारिणी की सूची में विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के समर्थकों के नाम सबसे ज्यादा है। जबकि विरोधी माने जाने वाले बालमुकुंद सिंह गौतम गुट को नाममात्र की जगह मिलने से पार्टी में अंदरूनी सुगबुगाहट तेज हो गई है।
सिंघार का सुपर 52
कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के तहत जारी इस कार्यकारिणी को राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और सह-प्रभारी उषा नायडू की सहमति से अंतिम रूप दिया गया है। स्थानीय स्तर पर धार जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी, विधायक भंवरसिंह शेखावत, प्रताप ग्रेवाल, सुरेन्द्रसिंह हानी बघेल और डॉ. हिरालाल अलावा की अनुसंशा भी शामिल की गई है।
सिंघार का दबदबा जारी रहेगा
हालांकि, सूची के जारी होते ही यह साफ हो गया कि जिले की कमान किसके हाथ में है। शहर अध्यक्ष पद पर पहले ही उमंग सिंघार समर्थक राजेश पटेल की नियुक्ति हो चुकी थी। अब जिला कार्यकारिणी में भी उनके वफादारों को अहम जिम्मेदारियां देकर सिंघार ने अपने राजनीतिक वर्चस्व पर मुहर लगा दी है।
महासचिव और सचिव पदों पर ताजपोशी
घोषित कार्यकारिणी में जिले के सभी प्रमुख क्षेत्रों से पदाधिकारियों को शामिल किया गया है जिसमें महासचिव: तिरला से डॉ. बी.आर. पाटीदार, धार से रईस शेख, धरमपुरी से साबिर शेख व कमल यादव, बदनावर से मोहम्मद साजिद, सोनू जाट व लियाकत पटेल, पीथमपुर से प्रेम पाटीदार, कुक्षी से शंकर सोलंकी, गुजरी से प्रदीप ठाकुर, सरदारपुर से शैलेंद्र चौहान व रघुनंदन शर्मा, दसई से बद्रीलाल पाटीदार, और गंधवानी से सतपाल सिंह बरनाला व आशिख खान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। धार शहर के गोपाल पाल को सचिव पद की कमान दी गई है।
गौतम समर्थकों की उपेक्षा से सुलग सकती है चिंगारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नई कार्यकारिणी से धार कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर उभर सकती है। पूर्व जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता बालमुकुंद सिंह गौतम के समर्थकों को कार्यकारिणी में अपेक्षित स्थान न मिलने से उनके खेमे में भारी नाराजगी देखने को मिलेगी। आने वाले समय में पदों के इस असंतुलन को लेकर संगठन के भीतर विरोध के सुर मुखर हो सकते हैं, जिसे साधना नए पदाधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती होगा।