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चंपत राय को दिए देवी अहिल्या राष्ट्रीय सम्मान पर विवाद, कांग्रेस ने पुरस्कार वापस लेने की मांग उठाई

राम जन्मभमि तीर्थ क्षेत्र में हुए चढ़ावा चोरी के मामले में चंपत राय का नाम सामने आया था। उन्होने महासचिव से इस्तीफा दिया था जो अब मंजूर हो गया है। उन पर राम मंदिर की दान राशि और चोरी जैसे कई सवाल उठ रहे थे। इस बीच 2025 में चपंत राय को इंदौर में देवी अहिल्या राष्ट्रीय सम्मान पुरस्कार मिला था, जिसको वापस लेने की मांग उठ रही है।

कांग्रेस ने वापस मंगा सम्मान, सुमित्रा महाजन को भी लिखा पत्र

कोंग्रस प्रवक्ता केके मिश्रा ने उन्हें इंदौर में दिए गए देवी अहिल्या राष्ट्रीय सम्मान पुरस्कार वापस मांगने की मांग की है। दरहसल, उन्होंने सुमित्रा महाजन ‘ताई’ को एक पत्र लिखते हुए कहा है कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर दिए सम्मान आज गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

मिश्रा ने कहा है कि 13 जनवरी 2025 को इंदौर की देवी अहिल्या जन्मोत्सव समिति ने चंपत राय को आरएसएस प्रमुख के हाथों यह सम्मान दिया गया था। उनका आरोप है कि चंपत राय को लेकर वित्तीय अनियमितताओं ,जमीन की खरीदी – बिक्री और और चंदे एवं दानपात्र से जुड़े गड़बड़ी के आरोप सामने आए है।

मिश्रा का कहना है कि चंपत राय को दिया गया देवी अहिल्या राष्ट्रीय सम्मान होल्कर के नाम से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सम्मान की गरिमा बनाए रखने पर के लिए दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

पुरस्कार देने समय भी जताई थी आपत्ति

मिश्रा ने पिछले साल जब समिति की बैठक में चंपत राय को सम्मान देने का फैसला लिया गया था तब भी सुमित्रा महाजन को पत्र लिख कर आपत्ति जताई थी।

पहले दिए गए पत्र में ताई ने यह कहा था

महाजन ने कहा था कि यह सम्मना किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं है। उनका कहना था कि चंपत राय उस सम्मान के प्रतिनिधि है। मां अहिल्या ने भी अपने जीवन में लगातार मंदिरों का निर्माण कराया था। इसलिए सभी भावना के तहत यह सम्मना दिया गया था।

 

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