बुक लवर्स डे: बचपन की कहानियों से लेकर इतिहास तक किताबों में दर्ज है हर किस्सा; इस तरह बनाए आज का दिन खास

किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी दोस्त होती है। पिछले हफ्ते ही हम सबने मित्रता दिवस मनाया था। इंसानों और किताबों की इसी सच्ची दोस्ती के लिए हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है ‘बुक लवर्स डे’। हर वो व्यक्ति जो किताबें पढ़ता है, किताबों से प्यार करता है उसके लिए बेहद खास दिन है। इस विशेष दिन को और खूबसूरत बनाने के लिए आज हम आपको कुछ ऐसी किताबों के बारे मे बताएंगे जो हर बुक लवर को कम से कम एक बार तो पढ़नी ही चाहिए ।
इब्नेबतूती
90 के दशक की लव स्टोरी और चिट्ठियों से प्यार है तो आपको दिव्य प्रकाश दुबे की इब्नेबतूती जरूर पढ़ना चाहिए। दो अलग-अलग सदियों के प्यार की खूबसूरती से पगी यह किताब आज के दिन को और भी खास बना देगी।

गबन
सालों पहले लिखा गया प्रेमचंद का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस समय था । प्रेमचंद के इस कालजयी उपन्यास में उन्होंने बहुत प्रभावी तरह से बताया है कि कैसे भ्रष्टाचार, लालच और जिद हमारे जीवन और रिश्तों को बुरी तरह प्रभावित कर देती है।

गर्ल्स विल बी गर्ल्स
अगर आज भी आपके अंदर आपका थोड़ा-सा बचपना जीवित है तो आपको रस्किन बॉन्ड की ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स’ जरूर पढ़ना चाहिए। इसमें आपको बचपन के कई मजेदार और भोले किस्से मिलेंगे। इन्हें पढ़ते हुए आप एक बार फिर अपने बचपन को जी पाएंगे।

द सीक्रेट
अगर आप नॉन-फिक्शनल किताबें पढ़ने के शौकीन है तो आपको रोंडा बर्न की ‘द सीक्रेट’ जरूर पढ़ना चाहिए । इस किताब को पढ़ने के बाद आप न सिर्फ अपने सोचने के बल्कि जीवन जीने के तरीके में भी सकारात्मक बदलाव महसूस करेंगे। यह किताब आपको सिखाएगी कि आप जीवन में सबकुछ हासिल कर सकते हो बस आपको ब्रह्मांड को अपना दोस्त बनाना होगा।

युगंधर
धार्मिक किताबें पढ़ने में रुचि है तो शिवाजी सावंत की युगंधर जरूर पढ़ें। इसमें श्रीकृष्ण के पूरे जीवन को बड़ी खूबसूरती और सरलता से लिखा गया है। इस किताब को पढ़ने के बाद आप कृष्ण को और बेहतर तरह से समझने लगेंगे।

एक युवा लड़की की डायरी
अगर आप इतिहास की कहानियों को जानने और समझने में रुचि रखते है तो एनी फ्रैंक की इस डायरी को जरूर पढ़ें। एनी ने यह डायरी नीदरलैंड पर नाज़ी कब्जे के दौरान लिखी थी । इसमे उस समय के दो साल का ब्योरा दर्ज है। उस समय का डर, परेशानियां, दर्द सब इस डायरी में मौजूद है। एनी की मौत के बाद उनके पिता ने इस डायरी को किताब के रूप में पब्लिश करवाया था।