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भोपाल में हेपेटाइटिस-C का दुर्लभ जीनोटाइप-4 मिला: छतरपुर के 26 वर्षीय मरीज में मिली बीमारी; मध्य भारत का पहला मामला

भोपाल। राजधानी के हमीदिया अस्पताल में भर्ती छतरपुर के 26 वर्षीय मरीज में हेपेटाइटिस-सी का दुर्लभ जीनोटाइप-4 सामने आया है। गांधी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य भारत में इस जीनोटाइप की मौजूदगी की पुष्टि का यह पहला पंजीकृत मामला है।

टीबी के इलाज के दौरान सामने आया हेपेटाइटिस-सी
छतरपुर का 26 वर्षीय मरीज टीबी के इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल में भर्ती था। इस दौरान उसे गंभीर पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दिए। जांच में हेपेटाइटिस-सी संक्रमण की पुष्टि हुई।

मामला जटिल होने के कारण विशेषज्ञों की विशेष टीम ने मरीज की जांच और निगरानी शुरू की। मरीज के नमूनों की आगे जांच करने पर हेपेटाइटिस-सी का जीनोटाइप-4 मिला। विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य प्रदेश और मध्य भारत में यह जीनोटाइप बेहद दुर्लभ है।

लिवर पर बढ़ सकता है नुकसान का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण समय पर नियंत्रित नहीं होने पर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

टीबी जैसी दूसरी गंभीर बीमारी के साथ हेपेटाइटिस-सी होने पर मरीज की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। हमीदिया अस्पताल और क्षेत्रीय श्वसन रोग संस्थान में मरीज की करीब छह दिनों तक गहन निगरानी की गई। इस दौरान उसके लिवर एंजाइम को सामान्य स्तर पर रखने में सफलता मिली।

अफ्रीका और मध्य-पूर्वी देशों में ज्यादा पाया जाता है
हेपेटाइटिस-सी का जीनोटाइप-4 मुख्य रूप से अफ्रीकी और मध्य-पूर्वी देशों में अधिक पाया जाता है। भारत में हेपेटाइटिस-सी के मरीजों में आमतौर पर जीनोटाइप-1 और जीनोटाइप-3 देखने को मिलते हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर भारत में जीनोटाइप-4 की हिस्सेदारी करीब 0.24 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत तक बताई जाती है। मध्य प्रदेश में इस जीनोटाइप का यह पहला पंजीकृत मामला बताया गया है।

विशेषज्ञ बोले- समय पर पहचान और निगरानी जरूरी
डॉ. सौरभ जैन, क्षेत्रीय श्वसन रोग संस्थान, जीएमसी भोपाल के अनुसार, हेपेटाइटिस-सी का जीनोटाइप-4 दुर्लभ है और इसके मामलों में लिवर की नियमित निगरानी जरूरी है। समय पर पहचान, उचित उपचार और निगरानी से गंभीर लिवर क्षति को रोकने में मदद मिल सकती है।

अब दूसरे मामलों की पहचान पर नजर
मध्य प्रदेश में जीनोटाइप-4 का मामला सामने आने के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस-सी के मरीजों में जीनोटाइप की जांच और निगरानी पर भी अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे प्रदेश में इस दुर्लभ जीनोटाइप की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

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