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आदिवासी परिवार की जमीन नामांतरण पर सवाल: 19 बीघा से ज्यादा जमीन गैर-आदिवासी महिला के नाम; SDM करेंगे जांच

झाबुआ। मेघनगर तहसील के ग्राम पंचायत नौगांवा में आदिवासी परिवार की 19 बीघा से अधिक पैतृक कृषि भूमि एक गैर-आदिवासी महिला के नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है। पीड़ित मनोज माल, रखमा, सुमली, रमेश और सविता ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मामले की शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना जमीन का नामांतरण किया गया।

पीएम किसान की राशि नहीं मिली तो सामने आया मामला
परिवार के मुताबिक, पीएम किसान सम्मान निधि की राशि नहीं मिलने पर एक महिला मेघनगर पहुंची और जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराई। इस दौरान पता चला कि उसके नाम कोई भूमि शेष नहीं है। इसके बाद परिजनों ने खसरा नकल निकलवाई तो उनकी पुश्तैनी जमीन नीतू राठौर नामक गैर-आदिवासी महिला के नाम दर्ज मिली।

जमीन पर बने हैं चार-पांच मकान
ग्रामीणों के अनुसार जिस जमीन का नामांतरण हुआ है, उस पर परिवार के चार-पांच मकान भी बने हुए हैं। परिवार की एक अन्य जमीन, जिसका नामांतरण और डायवर्शन पहले ही सविता पति कन्हैयालाल के नाम हो चुका था, वह भी नीतू राठौर के नाम दर्ज कर दी गई। ग्रामीणों ने स्थानीय पटवारी पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मामले को लेकर पूछताछ करने पर पटवारी ने उन्हें वहां से भगा दिया।

पेसा क्षेत्र में जमीन हस्तांतरण का मुद्दा
हिंदू युवा जनजाति संगठन के प्रमुख कमल डामोर के नेतृत्व में पीड़ित आदिवासियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) अधिनियम के अंतर्गत आता है। उन्होंने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता और संविधान की धारा 165(6) का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी की जमीन गैर-आदिवासी के नाम करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और कलेक्टर की पूर्व अनुमति जरूरी है।

अपर कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर सीएस सोलंकी ने शिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया। प्रशासन ने मेघनगर एसडीएम अवंधती प्रधान को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

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