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रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा: ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए साइन; चीन भी दायरे में

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों वाले कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून से ट्रंप प्रशासन को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की ताकत मिल गई है। भारत और चीन रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। हालांकि, कानून बनने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100% टैरिफ लगा दिया गया है। यह फैसला लेने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया गया है।

अमेरिकी संसद में बिल पास होने के बाद भारत ने कहा था कि इस कानून का असर भारत-अमेरिका संबंधों, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। भारत ने इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत भी की थी।

भारत के लिए क्यों अहम है यह कानून?
नए कानून के तहत अमेरिका रूस के तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। इसका असर उन देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर पड़ सकता है।

भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में अगर अमेरिका भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ सकता है।

ट्रंप ने 18 सितंबर को कानून पर किए साइन
व्हाइट हाउस के अनुसार ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को H.R. 5334 यानी “Lindsay O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” को कानून बनाया। इसमें रूस पर नए प्रतिबंध और टैरिफ से जुड़े प्रावधान हैं। साथ ही ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है।

रूस के अधिकारियों और बैंकों पर भी कार्रवाई
कानून में रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित लोगों व संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। रूस के ऊर्जा कारोबार और उसके तेल निर्यात में इस्तेमाल होने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को भी निशाना बनाया गया है। शैडो फ्लीट ऐसे जहाजों के नेटवर्क को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल रूस के तेल निर्यात को पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच जारी रखने के लिए किया जाता है।

ईरान पर भी 5 साल तक जारी रहेंगे प्रतिबंध
कानून में Iran Sanctions Act को पांच साल के लिए बढ़ाया गया है। इससे अमेरिकी सरकार के पास ईरान पर प्रतिबंध जारी रखने के अधिकार बने रहेंगे।

कानून का मकसद क्या है?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नए प्रावधान रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की दिशा में दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने इस कानून का समर्थन किया था।

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