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धार में रेल प्रोजेक्ट पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा: 2011 में हुआ था भूमिपूजन; 15 साल बाद उद्घाटन पर उठाए सवाल

धार। गंधवानी विधानसभा क्षेत्र के टांडा में रेल परियोजना के उद्घाटन को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास कार्यों का श्रेय लेने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस रेल परियोजना का अब उद्घाटन किया जा रहा है, उसका भूमिपूजन कांग्रेस शासनकाल में ही हो चुका था।

2011 में हुआ था भूमिपूजन
स्वतंत्र जोशी ने कहा कि रेल परियोजना का भूमिपूजन 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने झाबुआ में किया था। उस समय लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने आदिवासी अंचल को रेल सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से परियोजना की नींव रखी थी। 2011 से 2026 तक करीब 15 साल बीत चुके हैं। अब भाजपा सरकार कांग्रेस के समय रखी गई नींव पर उद्घाटन कर इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।

’15 साल तक परियोजना को ठंडे बस्ते में रखा’
जोशी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने परियोजना को लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रखा। इस दौरान आदिवासी क्षेत्र के विकास की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास कांग्रेस शासनकाल में शुरू की गई योजनाओं का उद्घाटन कर श्रेय लेने के अलावा कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार को श्रेय की राजनीति के बजाय आदिवासी अंचल के विकास पर ध्यान देना चाहिए।

PM के कार्यक्रम से मंत्री के जाने पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस के जिला मीडिया प्रभारी मनोज चौहान ने टांडा में हुए कार्यक्रम को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन चल रहा था, उसी दौरान मध्यप्रदेश सरकार के एक मंत्री अपने साथियों के साथ कार्यक्रम से चले गए।

चौहान ने इसे प्रधानमंत्री पद का अपमान बताते हुए कहा कि इस घटना से कार्यक्रम के प्रति भाजपा नेताओं की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं।

‘जल, जंगल, जमीन और रोजगार का अधिकार कब मिलेगा?’
स्वतंत्र जोशी ने कहा कि रेल लाइन का उद्घाटन होने के बावजूद आदिवासी अंचल के सामने मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों से जुड़े कई सवाल अब भी मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्षेत्र के आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन, शिक्षा और रोजगार का वास्तविक अधिकार कब मिलेगा।

जोशी ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध होने के बाद ही यहां के लोगों का जीवन वास्तव में विकास की पटरी पर आ सकेगा।

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