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भारत में चौथी तिमाही में रोजगार परिदृश्य मजबूत: 65% कर्मचारियों की संख्या बढ़ाएंगे; कंपनियों ने कहा- AI से तेज हुई हायरिंग

नई दिल्ली। भारत में 2026 की चौथी तिमाही में रोजगार का परिदृश्य मजबूत रहने की उम्मीद है। मैनपावरग्रुप के एम्प्लॉयमेंट आउटलुक सर्वे के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के बीच 65% नियोक्ता कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। वहीं 11% कंपनियां कर्मचारियों की संख्या घटा सकती हैं, जबकि 24% कंपनियों में स्टाफ की संख्या में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है।

सर्वे के मुताबिक, Q4 2026 के लिए भारत का नेट एम्प्लॉयमेंट आउटलुक (NEO) 54% रहा। यह पिछली तिमाही से 6 प्रतिशत अंक और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 11 प्रतिशत अंक अधिक है। भारत का रोजगार आउटलुक वैश्विक औसत से 25 प्रतिशत अंक ज्यादा है।

बदलती भूमिकाएं और नए कौशल बन रहे भर्ती की वजह
सर्वे में सामने आया कि कंपनियां सिर्फ कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए भर्ती नहीं कर रही हैं, बल्कि बदलती जॉब प्रोफाइल और नई स्किल की जरूरतों के मुताबिक अपने वर्कफोर्स को तैयार कर रही हैं।

कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाने वाले नियोक्ताओं में से 69% ने बदलती भूमिकाओं और कौशल की जरूरतों को भर्ती का कारण बताया। नई तकनीक के विस्तार और नए क्षेत्रों में कारोबार बढ़ने से कंपनियों को नई विशेषज्ञता वाले कर्मचारियों की जरूरत पड़ रही है।

विस्तार सबसे बड़ी वजह, टेक्नोलॉजी से घट सकती हैं नौकरियां
कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की प्रमुख वजह बिजनेस एक्सपेंशन बताई गई है। वहीं कर्मचारियों की संख्या घटाने के पीछे ऑटोमेशन, टेक्नोलॉजी और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख कारण हैं।

मैनपावरग्रुप इंडिया एंड मिडिल ईस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुलाटी के मुताबिक, भारत में नियोक्ताओं का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनियां अब केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय बदलती जरूरतों के हिसाब से क्षमताएं विकसित करने पर जोर दे रही हैं।

भर्ती प्रक्रिया हुई तेज, AI का बढ़ता इस्तेमाल
सर्वे में भर्ती प्रक्रिया में भी तेजी आने की बात सामने आई है। 57% नियोक्ताओं ने कहा कि एक साल पहले की तुलना में उनकी टाइम-टू-हायर प्रक्रिया तेज हुई है।

इसमें भर्ती प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल की अहम भूमिका बताई गई है। हालांकि, कंपनियों के सामने सही कौशल वाले उम्मीदवारों को तलाशना अब भी बड़ी चुनौती है।

बदलती नौकरी आवश्यकताओं के बीच कंपनियों के लिए ऐसे कर्मचारियों की तलाश मुश्किल हो रही है, जिनके पास जरूरी तकनीकी और पेशेवर कौशल हों। ऐसे में अपस्किलिंग और लगातार सीखने पर निवेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फाइनेंस और हॉस्पिटैलिटी में सबसे ज्यादा रोजगार की उम्मीद
सर्वे में भारत के सभी 9 सेक्टरों में आगामी तिमाही के दौरान कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।

  • फाइनेंस एंड इंश्योरेंस: 60% NEO के साथ सबसे आगे।
  • हॉस्पिटैलिटी: 58% NEO के साथ दूसरे स्थान पर।
  • इन्फॉर्मेशन सेक्टर: 57% NEO के साथ तीसरे स्थान पर।

फाइनेंस एंड इंश्योरेंस सेक्टर में पिछली तिमाही और 2025 की चौथी तिमाही, दोनों की तुलना में 4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर इस सेक्टर में रोजगार संभावनाओं के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है।

हॉस्पिटैलिटी में 21 अंक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी
पिछली तिमाही की तुलना में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के रोजगार आउटलुक में 21 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा पब्लिक सेक्टर, हेल्थ एंड सोशल सर्विसेज में 15 अंक और ट्रेड एंड लॉजिस्टिक्स में 9 अंक की बढ़ोतरी हुई है।

वहीं यूटिलिटीज एंड नेचुरल रिसोर्सेज में पिछली तिमाही की तुलना में 23 अंकों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रोफेशनल, साइंटिफिक एंड टेक्निकल सर्विसेज में भी 3 अंकों की कमी आई है।

AI और स्किल गैप बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रोजगार बाजार मजबूत बना हुआ है, लेकिन कंपनियों के सामने AI आधारित वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन, स्किल की कमी और उम्मीदवारों की अपेक्षाओं व नौकरी की जरूरतों के बीच अंतर जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

मैनपावरग्रुप के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों की भर्ती रणनीति केवल ज्यादा लोगों को नौकरी देने तक सीमित नहीं रहेगी। बदलती तकनीक और कारोबारी जरूरतों के मुताबिक नई क्षमताएं तैयार करना और मौजूदा कर्मचारियों को अपस्किल करना भी कंपनियों की प्राथमिकता रहेगी।

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