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दो महीने में 40% महंगी हुई चीनी अब होगी सस्ती: केंद्र सरकार ने आयात टैक्स-फ्री किया; रिटेल में ₹55 किलो तक पहुंचे थे दाम

नई दिल्ली। आगामी त्योहारी सीजन से पहले देश की आम जनता और मिठाई कारोबारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बीते दो महीनों में चीनी की कीमतों में आए लगभग 40 प्रतिशत के उछाल पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने चीनी के आयात को 31 अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह से टैक्स-फ्री (सीमा शुल्क मुक्त) कर दिया है।

वर्तमान में देश के खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें ₹55 प्रति किलो के आंकड़े के आसपास पहुंच गई हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम सप्लाई चेन को मजबूत करने और दामों को नीचे लाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर ईरान और आसपास के क्षेत्रों में जारी जंग के हालात तथा स्थानीय स्तर पर सप्लाई कम होने का सीधा असर पिछले दो महीनों में चीनी के दामों पर देखा गया। अचानक मांग बढ़ने और सप्लाई में अड़चन आने से रिटेल मार्केट में कीमतें 40% तक चढ़ गईं। इस तेजी को थामने के लिए सरकार ने टैक्स छूट का अध्यादेश जारी किया है। आदेश के तहत, आयातित चीनी की यह खेप आज से लेकर 31 अक्टूबर तक देश के बंदरगाहों पर पहुंच जानी चाहिए।

त्योहारों में खपत ज्यादा, हलवाइयों और बिस्कुट कंपनियों को राहत

अक्टूबर के महीने में देश भर में दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। इस दौरान देश में मिठाइयों, पकवानों और बेकरी उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। त्योहारी सीजन को देखते हुए बड़ी बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां भी पहले से चीनी का स्टॉक जमा करने लगती हैं। टैक्स-फ्री आयात से बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध होगी, जिससे सप्लाई की किल्लत दूर होगी और हलवाइयों से लेकर आम उपभोक्ताओं को त्योहारी सीजन में बढ़ी हुई कीमतों से सीधी राहत मिलेगी।

ग्लोबल मार्केट पर असर: लंदन और न्यूयॉर्क में चढ़ सकते हैं दाम

कमोडिटी एक्सपर्ट्स और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारत के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में हलचल तेज होगी। जैसे ही भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार से 10 लाख टन कच्ची चीनी की खरीद शुरू करेगा, ग्लोबल मार्केट में इसकी डिमांड अचानक उछलेगी। इसका सीधा असर लंदन और न्यूयॉर्क के कमोडिटी एक्सचेंजों में चीनी की बेंचमार्क कीमतों पर देखने को मिल सकता है, जिससे आने वाले दिनों में विदेशी बाजारों में शक्कर महंगी हो सकती है।

निर्यात पर 30 सितंबर तक पूरी तरह से बैन

देश के भीतर शक्कर की कोई कमी न हो और खाद्य सुरक्षा बनी रहे, इसके लिए सरकार ने निर्यात पर भी सख्त रुख अपनाया है। चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी रहेगा। सरकार ने चीनी को ‘प्रतिबंधित’ (रिफ्रैक्टेड) श्रेणी में डाल दिया है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार की विशेष अनुमति के बिना कोई भी व्यापारी देश के बाहर चीनी का निर्यात नहीं कर सकेगा, ताकि घरेलू जरूरतें प्राथमिकता के आधार पर पूरी हो सकें।

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