‘जल-जंगल-जमीन हमारा अधिकार’: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बोले- प्रकृति के साथ तालमेल आदिवासी की पहचान

भोपाल। विश्व आदिवासी दिवस पर मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समाज को शुभकामनाएं देते हुए जल-जंगल-जमीन, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा- आदिवासी समाज केवल प्रकृति के बीच रहने वाला समुदाय नहीं, बल्कि प्रकृति का वास्तविक रक्षक है।
सिंघार ने अपने संदेश में कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व, संस्कृति और पुरखों के संघर्ष को याद करने का दिन है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की जीवनशैली सह-अस्तित्व, सामुदायिकता और प्रकृति के प्रति सम्मान पर आधारित है। वन, पर्वत और नदियां उनके लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि पूज्य देव और पूर्वज हैं।
प्रकृति के साथ तालमेल को बताया आदिवासी पहचान
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में ‘मैं’ नहीं, बल्कि ‘हम’ की भावना सबसे बड़ी ताकत है। समाज में महिलाओं को सम्मानजनक स्थान प्राप्त है और श्रम को जीवन का आधार माना जाता है। मांदल की थाप पर होने वाले पारंपरिक नृत्य और लोकगीत प्रकृति, बारिश, मिट्टी और फसलों के साथ सीधे संवाद का माध्यम हैं।
भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश में आदिवासी गौरव के दावे किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर संकट बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम का सही काम नहीं हो रहा और बड़ी संख्या में आदिवासियों के वन अधिकार संबंधी आवेदन खारिज किए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पेसा कानून को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया और ग्राम सभाओं के वास्तविक अधिकार नौकरशाही के नियंत्रण में चले गए हैं। साथ ही आदिवासी युवाओं और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों पर चिंता जताई।
आदिवासी धर्म कोड की मांग दोहराई
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है, इसलिए जनगणना 2027 में आदिवासी धर्म कोड के लिए अलग कॉलम सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मांग लंबे समय से आदिवासी समाज उठाता रहा है।
शिक्षा, रोजगार और जमीन के अधिकार पर जोर
सिंघार ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल प्रतीकात्मक सम्मान नहीं, बल्कि जमीन पर मालिकाना हक़, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं के लिए रोजगार और जल-जंगल-जमीन पर संवैधानिक अधिकार चाहिए। उन्होंने कहा कि वे विधानसभा में केवल विपक्ष के नेता के रूप में नहीं, बल्कि उस आखिरी आदिवासी व्यक्ति की आवाज़ बनकर खड़े हैं जिसकी जमीन और अधिकार खतरे में हैं।
एकजुट होने का किया आह्वान
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर उमंग सिंघार ने आदिवासी समाज से अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी माटी और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा और जल-जंगल-जमीन का सौदा नहीं होने देगा।