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उमर अब्दुल्ला और पायल का तलाक: सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी; 14 साल से अलग रह रहे थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला को तलाक की मंजूरी दे दी।

दोनों की शादी करीब 32 साल पहले हुई थी और वे वर्ष 2011 से अलग रह रहे थे। अदालत को दोनों पक्षों ने बताया कि उन्होंने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने और सभी विवादों को सुलझाने का निर्णय लिया है।

हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी शादी को समाप्त करने से इनकार कर दिया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष आया।

ओबेरॉय होटल में हुई थी दोनों की मुलाकात
उमर और पायल की मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में हुई थी, जहां दोनों काम करते थे। दोनों के दो बेटे हैं, जिनके नाम जहीर और जमीर बताए जाते हैं।

अनुच्छेद 142 के तहत दाखिल किया आवेदन
उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों ने इस महीने की शुरुआत में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने के लिए संयुक्त आवेदन दाखिल किया था।

एलिमनी को लेकर भी हुई थी चर्चा
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया था। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया था कि पायल तलाक देने के लिए तैयार नहीं हैं और 300 करोड़ रुपए की एलिमनी की मांग कर रही हैं। हालांकि इस संबंध में अदालत की ओर से कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की गई थी।

क्रूरता के आधार पर मांगा था तलाक
उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी। वर्ष 2016 में फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वे यह साबित नहीं कर सके कि विवाह पूरी तरह टूट चुका है। अदालत ने क्रूरता के आरोपों को भी अस्पष्ट और पर्याप्त साक्ष्यों से रहित माना था।

दिल्ली हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया था।

गुजारा भत्ता देने का दिया गया था निर्देश
हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पायल को 1.5 लाख रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने और एक बेटे की पढ़ाई के लिए 60 हजार रुपए प्रतिमाह भुगतान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

अप्रैल 2025 में सुलह का दिया था सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में दोनों पक्षों को एक साथ बैठकर विवाद सुलझाने का निर्देश दिया था। इसके बाद दोनों के बीच सहमति बनने पर अदालत ने अब विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी है।

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