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बड़वानी में NEET धांधली के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग; सोनम वांगचुक के समर्थन में भी उठी आवाज

बड़वानी। NEET-UG समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के विरोध में बड़वानी में छात्रों और सामाजिक संगठनों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी कारंजा चौपाटी पर टेंट लगाकर डटे हुए हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन की शुरुआत बुधवार को सांसद गजेंद्र सिंह पटेल के बंगले के बाहर प्रदर्शन से हुई। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुबह से देर रात तक नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारी कारंजा चौपाटी पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। गुरुवार सुबह टेंट लगाकर धरने को अनिश्चितकालीन रूप दे दिया गया।

धरने में एनएसयूआई, जयस, कांग्रेस और कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो”, “छात्रों पर लाठीचार्ज बंद करो” जैसे नारे लगाए गए। ढोल-मंजीरों के साथ छात्रों ने अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हर साल लाखों छात्र कड़ी मेहनत से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक और धांधली के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और कथित दुर्व्यवहार की भी उन्होंने निंदा की।

प्रदर्शन में शामिल सीमा वास्कले ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ NEET की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र को बचाने की है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक धरना जारी रहेगा।

वहीं, एनएसयूआई जिला अध्यक्ष बादल गिरासे ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रदर्शनकारियों ने लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में भी आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि यदि वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं, तो उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

धरने को देखते हुए प्रशासन ने कारंजा चौपाटी और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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